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दूसरी ओर शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के बीच सरकार बनाने पर डील पक्की हो चुकी है। हालांकि सीएम उद्धव ठाकरे बनेंगे या आदित्य ठाकरे, इसका ऐलान अभी नहीं हुआ है।

महाराष्ट्र की राजनीति को नई दिशा व दशा मिलने की तैयारी शुरू हो गई है। कांग्रेस, एनसीपी व शिवसेना की तिकड़ी सरकार बनाने की तैयारी में जुट गई है। एनसीपी के शरद पवार ने कहा-भी कि महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार बनेगी। और पांच साल साथ में काम भी करेगी।

महाराष्ट्र में सत्ता के लिए जंग जारी है, लेकिन इस बीच सरकार गठन को लेकर सस्पेंस खत्म होता नजर आ रहा है। महाराष्ट्र में सरकार गठन में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार मुख्य भूमिका में हैं। शरद पवार ने कहा कि सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

महाराष्ट्र में सत्ता के लिए जंग जारी है, लेकिन इस बीच सरकार गठन को लेकर सस्पेंस खत्म होता नजर आ रहा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जो भी सरकार बनेगी वह पांच साल तक चलेगी।

महाराष्ट्र में सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है। मिली जानकारी के मुताबिक, काफी लंबी कवायद के बाद शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के बीच सरकार बनाने को लेकर समझौता हो गया है।

रविवार को होने वाली एनडीए की बैठक में शिवसेना भाग नहीं लेगी। ऐसा महाराष्ट्र एनसीपी और कांग्रेस से नजदीकी बढ़ने के कारण हुआ है। महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना के बीच दरार पड़ चुकी है। लेकिन अब तक शिवसेना ने आधिकारिक तौर पर अपना समर्थन वापस नहीं लिया है

महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर कोशिश जारी हैं। मीडिया रिपोर्ट में शिवसेना के सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि पार्टी ने उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने की पेशकश की है और सभी को इस फैसले के बारे में जानकारी दे दी गई है।

अमित शाह ने कहा कि, चुनावों से पहले प्रधानमंत्री और मैंने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा था कि यदि हमारा गठबंधन जीतता है तो देवेंद्र फडणवीस सीएम होंगे।

सरकार गठन पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और गृहमंत्री अमित शाह ने शिवसेना के आरोपों पर कहा कि इससे पहले किसी भी राज्य में इतना समया नहीं मिला था। महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए 18 दिन दिए गए थे।

महाराष्ट्र में सत्ता के लिए जंग अभी जारी है। शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के बीच सरकार बनाने के लिए बातचीत जारी है। मंगलवार को सरकार गठन को लेकर तीन पार्टियों में चर्चा चल ही रही थी और कोई फैसला होता उससे पहले ही प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग गया।