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महाराष्ट्र का सियासी मिजाज अब बदल चुका है। शिवसेना की पुरानी दोस्त बीजेपी अब उसकी सियासी दुश्मन बन चुकी है तो कभी वैचारिक विरोधी रही कांग्रेस-एनसीपी ही आज..

मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के भगवामय होने की अभी सुगबुहाटें ही चल रही थीं, कि इस बीच आज एक संकेत उभर कर आया है। आज शिवसेना भवन के ठीक सामने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का एक भगवा पोस्टर नजर आया है। जिस पर कुछ चुनौतीपूर्ण शब्दों में लिखा दिख रहा है। इस भगवा रंग में रंगे …

शिवसेना नेता संजय राउत ने इंदिरा गांधी और करीम लाला के कनेक्शन वाले बयान को विवाद बढ़ने के बाद वापस ले लिया है। उन्होंने कहा कि अगर उनके बयान से...

शिवसेना नेता संजय राउत ने एनसीपी और कांग्रेस का अपनी पार्टी से गठबंधन कराकर सरकार बनवाने में बड़ी भूमिका निभाई है। महाराष्ट्र सरकार बनने में उन्होंने बीजेपी को हराने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

शिवसेना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना छत्रपति शिवाजी से करने वाली किताब को 'पाखंड और चाटुकारिता' की हद बताया और जोर देकर कहा कि मोदी कोई 'भारत के...

सीएए, एनपीआर या एनआरसी से महाराष्ट्र में किसी को डरने जरूरत नहीं मुंबई, 5 जनवरी। शिवसेना सांसद संजय राउत ने कल शाम जमात-ए-इस्लामी हिंद द्वारा आयोजित एक सेमिनार में हिस्सा लिया। सेमिनार का विषय “सीएए, एनपीआर एवं एनआरसी के मध्य सम्बन्ध” था। यह सेमिनार पिछले कई दिनों से चर्चा का विषय था क्योंकि संजय राउत …

महाराष्ट्र सरकार के मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा गया है। इनमें एनसीपी के नेताओं समेत कांग्रेस और शिवसेना के मंत्रियों को उनके कद के आधार पर विभाग दिए गये हैं। जल्द ही सभी मंत्री अपने अपने विभागों का चार्ज भी ले लेंगे।

कांग्रेस सेवादल के विनायक सावरकर पर टिप्पणी करने वाली किताब पर बवाल बढ़ गया है। बीजेपी और सावरकर के परपोते ने इस पर सवाल खड़े किए हैं और हमला बोला है। अब इस बीच शिवेसना सांसद संजय राउत ने कहा कि वीर सावरकर एक महान व्यक्ति थे और एक महान व्यक्ति बने रहेंगे।

महाराष्ट्र की राजनीति में उठापटक का दौर जारी है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिल कर भाजपा को तो सत्ता से बाहर कर दिया और सरकार बना ली, लेकिन अब गठबंधन की उद्धव सरकार में तालमेल नहीं बन पा रहा है।

बता दें कि महाराष्ट्र के बीड जिले के मजलगांव सीट से एनसीपी विधायक प्रकाश सोलंके ने कहा कि वह विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देंगे, क्योंकि वह राजनीति करने के लिए अयोग्य हैं।