‘Shramik Special Train’

राज्यों की मांग के अनुरूप भारतीय रेलवे श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के माध्यम से प्रवासियों के आरामदायक और सुरक्षित आवागमन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

बस्ती, गोंडा, लखनऊ और कानपुर जैसे स्टेशनों पर चढ़े यात्रियों को मिलाकर ट्रेन में सिर्फ 156 यात्री ही पहुंचे। इस तरह योगी सरकार ने एक यात्री पर करीब 10, 846 रुपये खर्च किया।

मंडल रेल प्रबंधक संदीप माथुर के दिशा-निर्देशन में श्रमिकों को अपने गंतव्य तक पहुंचाने हेतु नियमित रूप से श्रमिक स्पेशलों का संचालन किया जा रहा है।

झाँसी: श्रमिकों को अपने गंतव्य तक पहुंचाने हेतु नियमित रूप से श्रमिक स्पेशलों का संचालन किया जा रहा है। इसी क्रम में आज झाँसी से गोरखपुर तथा वाराणसी एक-एक श्रमिक एक्सप्रेस का संचालन किया गया जिसमें 2026 श्रमिकों को अपने गंतव्य की ओर रवाना किया गया। साथ ही आवश्यकतानुसार/ उपलब्धता के आधार पर भी इन …

लॉकडाउन के चलते दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए रेलवे एक मई से श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चला रहा है। वहीं इन श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से यात्रा करने के दौरान मात्र 48 घंटे के अंदर नौ यात्रियों की मौत हो गई है।

श्रमिकों को अपने गंतव्य तक पहुंचाने हेतु नियमित रूप से श्रमिक स्पेशलों का संचालन किया जा रहा है। इसी क्रम में आज झाँसी से गोरखपुर तथा वाराणसी के लिए 3050 श्रमिकों को अपने गंतव्य की ओर रवाना किया गया।

राष्ट्रीय लोकदल के वरिष्ठ महासचिव एवं प्रदेश के पूर्व सिंचाई मंत्री डॉ. मैराजुद्दीन अहमद ने बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर रेलवे स्टेशन परिसर में एक गरीब महिला की मौत को बेहद दुखद बताते हुए कहा है कि कोरोना काल में गरीब कैसे-कैसे सितम सह रहे हैं, इस घटना से भली-भांति समझा जा सकता है।

श्रमिक स्पेशल एक्सप्रेस ट्रेन में तबीयत बिगड़ने से दो यात्री की मौत हो गई। तो वहीं ट्रेन से उतरकर घर जा रहे एक प्रवासी की रोडवेज बस स्टेशन पर मौत हो गई। तीन मौत की घटनाओं के बाद रेल यात्रियों में हड़कंप मच गया है।

7 मई को अहमदाबाद से 1318 प्रवासी और दूसरी ट्रेन 14 मई को गुजरात के बड़ोदरा से 1815 प्रवासी मजदूरों को लेकर आई थी। बुधवार तड़के श्रमिक स्पेशल ट्रेन राजस्थान से 159 मजदूरों को लेकर इत्रनगरी पहुंची।

प्रवासी मजदूरों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए हर रोज सैकड़ों की तादाद में श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है। लेकिन इन ट्रेनों में से कुछ ऐसी भी हैं, जो मजदूरों को बहुत देर से उनके गंतव्य तक पहुंचा रही है।