Sonbhadra massacre

कोतवाली क्षेत्र के मर्सड़ा गांव में 74 बीघे जमीन पर आदिवासी ग्रामीणों के अवैध तरीके से कब्जा करने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उसे मुक्त कराया।

कैलाश,  रामपति, छोटेलाल सहित अन्य कई लोगों ने बताया कि जिस जगह गोली चली वह जमीन हम लोगों के नाम आज भी खतौनी में दर्ज है। एक खेत में भागने के दौरान एक कल्टीवेटर भी छूट गया था, जिस खेत में वह छुटा था उस जमीन का नंबर 17 बताया गया।

सोनभद्र कत्लेआम से कई माह पूर्व अपना दल( एस) के दुद्धि विधायक हरिराम चेरो द्वारा कई माह पूर्व ही मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार व बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्राचार के माध्यम से समस्या के त्वरित निस्तारण करने के लिए आग्रह व निवेदन किया गया था किंतु नौकरशाही ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया। यदि नौकरशाही चेत जाती तो सोनभद्र कत्लेआम से बच सकता था।

सोनभद्र में हाल में हुए सामूहिक हत्याकांड मामले को लेकर सोमवार को विधान परिषद में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के बाद सपा और कांग्रेस के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।

सोनभद्र के उम्भा गांव की कहानी सिर्फ जमीन पर कब्जे की नहीं है। यह कहानी प्रदेश भर में सरकारी जमीन को हथियाने का काम करने वाले तमाम गिरोहों के ‘सोनभद्र के कारनामे’ की कलई खोलती है।

मुख्यमंत्री के निर्देश के मुताबिक रॉबर्ट्सगंज और दुद्धी के बीच ओबरा के नाम से एक नई तहसील के साथ साथ कर्मा और कोन के नाम दो ब्लाक बनाये जाएंगे जिससे आदिवासी और गरीब परिवारों को इनके मुख्यालयों तक पहुचने में आसानी होगी ।