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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज वो काम किया जो उन्होंने पिछले ढाई साल के कार्यकाल में नहीं किया। अधिकारियों के पेंच कसे उनके मोबाइल बाहर रखवा दिए।

समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) गठबंधन को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर बयान दिया है। अखिलेश यादव ने कहा कि जिंदगी में कई बार प्रयोग असफल होते हैं लेकिन उससे कमियों को पता चल जाता है।

उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा-आरएलडी की गांठ अब पूरी तरह से खुल चुकी है। बसपा सुप्रीमो मायावती के बाद अब राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख चौधरी अजित सिंह भी गठबंधन से अलग हो गए हैं।

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपनी करीब ढाई दशक पुरानी दुश्मनी भुलाकर लोकसभा चुनाव 2019 में एक साथ आए थे, लेकिन चुनाव खत्म होने के महज दो हफ्तों के भीतर ही सपा और बसपा के बीच बना गठबंधन खत्म हो चुका है।

सपा व रालोद से गठबंधन करने के बावजूद लोकसभा चुनाव में मिली करार हार के बाद बसपा सुप्रीमों मायावती के बयान पर पलटवार करते हुये मुलायम की छोटी पुत्रवधू अपर्णा यादव ने कहा है कि जो सम्मान पचाना नहीं जानता वह अपमान भी नहीं पचा पाता है।

लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन टूटने की कगार पर पहुंच चुका है। मायावती और अखिलेश के आए बयानों से साफ हो चुका है कि गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) गठबंधन की गांठ खुल चुकी है। बसपा की समीक्षा बैठक के बाद खबर आई कि मायावती ने कहा है कि बसपा उपचुनाव में अकेले उतरेगी।

दिल्ली में सोमवार को यूपी के सांसदों, विधायकों, पार्टी पदाधिकारियों, जोनल इंचार्जों और जिलाध्यक्षों के साथ समीक्षा बैठक में बसपा सुप्रीमों मायावती ने समाजवादी पार्टी व राष्ट्रीय लोकदल के साथ किये गये गठबंधन के टूटने के संकेत दिए।

एक अन्य कमेंट में कहा गया है कि अगर सपा अपनी परम्परागत प्रतिद्वंदी बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन कर सकती है तो अपने तो अपने होते है, एक साथ हो कर देख ले 2022 में बुआ की जरूरत नहीं पडेगी और हम फिर सरकार में होंगे।

श्रीधर अग्निहोत्री लखनऊ: पूरे देश में मोदी की सुनामी चलने के साथ ही यूपी में भी विपक्ष को तूफान का सामना करना पड़ा। पार्टी संगठन और सरकार के बेहतर तालमेल के बावजूद सपा-बसपा में गठबंधन होने के कारण भाजपा 2014 का तो अपना पुराना प्रदर्शन नहीं दोहरा सकी, लेकिन सत्ता विरोधी माहौल को रोकने में कामयाब …