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14 फरवरी को प्यार करने वालों का दिन माना जाता है। लेकिन ये जरुरी नहीं कि वो आपका सिर्फ हमसफर पार्टनर हो, बल्कि कोई सख्श जो आपके लिए मायने रखता है उससे प्यार का इजहार कर सकते हैं।इसमे आपकी गर्लफ्रेंड/ब्वॉयफ्रेंड तो हो सकती/सकता है।

सैय्यद अख्तर हुसैन रिजवी उर्फ़ कैफ़ी आजमी एक उर्दू-हिंदी शायर और लाखों दिलों की धड़कन है। उनके शब्द आज भी लोगों के दिलोंदिमाग में गूंजते हैं। उन्होंने हिन्दी फिल्मों के लिए भी कई प्रसिद्ध गीत व ग़ज़लें भी लिखीं, जिनमें देशभक्ति का अमर गीत -"कर चले हम फिदा, जान-ओ-तन साथियों" भी शामिल है।

कठोर से कठोर व्यक्ति का दिल बच्चे की मुस्कान जीत लेती है। कहते हैं कि बच्चों का मन सच्चा होता है। ये नन्हें फूल हर किसी को प्यारे लगते हैं। शायर साहिर की ये चंद लाइने बच्चे मन के सच्चे ये वो नन्हे फूल है जो भगवान को लगते प्यारे....  बच्चों के मन की खूबसूरती को बयां करते हैं।

छठ पर्व सूर्य की उपासना का प्रकृति पर्व है। छठ ही एक ऐसा पर्व है जिसमें डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। छठ पर्व का व्रत बहुत कठिन होता है। मान्यता है कि छठ के 4 दिनों में सूर्यदेव और उनकी बहन छठी देवी की पूजा से व्रतियों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।

आज धनतेरस है। जो कार्तिक के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान धनवंतरि और कुबेर के साथ मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है।इस बार धनतेरस पर ब्रह्म सिद्ध महायोग बन रहा है।जो धन प्राप्ति का मार्ग बनाएगा। इस साल धनतेरस के दिन शुक्र, प्रदोष और धन त्रयोदशी का महायोग है।

इस दिन महिलाएं पूरे दिन अपने पति के लिए व्रत रखती हैं और दुल्हन की तरह सज कर चांद की पूजा करती हैं। दुल्हन की तरह सजी महिलाओं के हाथ में अगर बेरंग पूजा की थाली हो तो अच्छा नहीं लगेगा। इस बार करवा चौथ पर खुद तैयार होने से पहले अपनी पूजा की थाली की भी सजावट कर लें।

उन्होने रामायण की रचना की थी। माना जाता है कि रामायण वैदिक जगत का सर्वप्रथम काव्य था।रामायण की रचना महर्षि वाल्मीकि ने संस्कृत भाषा में की थी और जिसमें कुल चौबीस हजार श्लोक है।

नवरात्रि नजदीक आने को हैं और घरों में इसकी तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। सभी इस त्योहार बड़े जोश के साथ सेलेब्रेट करते हैं और अपने घर को सजाते हैं। घर को सजाने के लिए यूनिक और डिफरेंट आइडियास की जरूरत होती हैं

पितृ पक्ष के समय पितरों का तर्पण कर उनके मोक्ष की कामना की जाती है। हिंदू धर्म और पंचांगों में श्राद्ध के लिए बहुत सारे नियम बने हैं। जिनका पालन करना हर एक हिंदू के लिए अनिवार्य है।  श्राद्ध करने से पितरों का आशीर्वाद तो बना रहता है। उनकी आत्मा को भी शांति मिलती है।

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी  के तौर पर मनाया जाता हैं। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, इसलिए चारों ओर खुशियाँ मनाई जाती हैं। इस दिन देश के सभी कृष्ण मंदिरों में पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण किया जाता हैं। देश में मथुरा-वृंदावन के अलावा एक मंदिर ऐसा है जहां जन्माष्टमी के दिन आधी रात को भगवान कृष्ण दर्शन देते हैं।ये हैं द्वारिकाधीश मन्दिर ।