story

पूरे अट्टहास के साथ इन सात बूढ़ों के अलावा और भी बूढ़े रोज इनके बीच आते-जाते रहते हँ। सुबह साढ़े पाँच और छह के बीच यहाँ से गुजरते कोई भी इसमें डूब सकता है।

हमारे तमाम जानने वालों के बच्चे हाईस्कूल में हैं। उनके चेहरे पर हाईस्कूल का भय है। उनके घरों में अनुशासन पर्व चल रहा है। बच्चा जुटा है पढ़ने में।

एक नौकर था वह दस रोज पहले घर का कुछ सामान ले कर दिन में ही भाग गया। तब से मैं ऐसे ही ब्रेड खा लिया करता हूँ। कभी डॉक्टर अंकल कुछ ला देते हैं

कौन सा... कौन सा समय होता है घड़ीसाज का। उसने चश्मे के अंदर अपनी कंजी और मिरमिरी सी आँखों से घूरते हुए दार्शनिक अंदाज में सीधे मेरी ओर उछाला था यह सवाल।

आज युवा घरों से दूर जाकर जॉब कर रहे हैं और प्रोफेशन लाइफ में आज हर कोई बिजी है। चाहे वो गर्ल्स हो या ब्वॉयज। सब अपन घरों से दूर रहकर शहरों में नौकरियां कर रहे हैं। ऐसे में दूर देश में रहने वाले उनके साथी, उनके कलीग्स ही वहां उनके अपने होते हैं। इसमें जेंडर भी मायने नहीं रखता है।

सलमान खान के साथ फिल्म वीरगति में दिखी एक्ट्रेस पूजा डडवाल पिछले साल टीबी की बीमारी  से पीड़ित थी। तब अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी पूजा की सलमान खान ने आर्थिक मदद की थी।

आज से अब सिख श्रद्धालु करतारपुर जाकर सिखों के इस पवित्र धाम का दर्शन कर पाएंगे। श्रद्धालुओं का पहला जत्था रवाना हो चुका है। जिस पवित्र धाम के दर्शन के श्रद्धालु इतने उत्साहित थे। जानते हैं करतारपुर गुरुद्वारा सिखों के लिए क्यों इतना पवित्र है ...

डकैतों का इतिहास बहुत पुराना रहा है । यहां की भौगोलिक स्थिति अपराधियो के लिए काफी अनूकूल है। प्रारम्भ से ही आज भी यह क्षेत्र जंगल एवं पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण डकैतों की शरणस्थली रहा है। दस्यु समस्या होने के कारण यहां का विकास काफी प्रभावित हुआ। बता दें कि बुन्देलखण्ड का चित्रकूट जिला डकैतों के गढ़ के रूप में जाना जाता रहा है।

आपको बता दें कि आज भी लोग बापू का पसंदीदा खादी धोती, चरखा, चश्मा, खड़ाऊ, को अपना रहे हैं, इन सभी चीजों को देखते ही लोगों के जहन में बापू याद आ जाते हैं, उनका चश्मे, खादी धोती आदि का ट्रेंड आज भी बना हुआ है।

खास बात यह है कि वर्तमान समय में मनु गांधी की डायरी 12 खंडों में भारत के अभिलेखागार में संरक्षित हैं, ये सभी गुजराती भाषा में लिखी गई हैं। उन्होंने इस डायरी में गांधी के भाषणों और पत्रों को शामिल किया है, इनमें उनके कुछ अंग्रेज़ी के वर्कबुक भी शामिल हैं। इसका बाद में अंग्रेज़ी में अनुवाद कर प्रकाशित किया गया।