Sun

हमारा सौर मंडल देखा जाए तो खगोलीय घटनाओं का भंडार है। हम सौर मंडल में कब क्या कैसेे होने वाला है, इस बात का तो अंदाजा लगा लेते हैं, लेकिन इन घटनाओं का रिजल्ट क्या और कहां तक कितना होगा ये नहीं पता कर पाते हैं।

नवग्रहों में सूर्य सर्वप्रमुख देवता हैं | सूर्यदेव को आत्मा का कारक माना गया है,यह पिता का प्रतिधिनित्व करते है। सूर्य के मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश करने के साथ ही संसार भर मे चेंज आएगा। कोरोना की इन्टेन्सिटी मध्यम पड़ेगी।  बीते रविवार की रात 12 बजकर 29 मिनट पर सूर्यदेव मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश कर गया

 पूरी दुनिया के साथ-साथ अब गैलेक्सी में मौजूद सूरज पर भी लॉकडाउन लग गया है। यानि धरती को ऊर्जा प्रदान करने वाला सूरज का तापमान आजकल कम होता जा रहा है।

सूर्य पुत्र शनि को न्याय का देवता मानते हैं। 24 जनवरी 2020 से शनि धनु राशि को छोड़ देंगे और शनि अपनी स्वराशि मकर में गोचर करेंगे। धनु और मकर राशि मे पहले से ही शनि की साढ़ेसाती चल रही है। शनि की महादशा 19 साल की होती है।

ग्रहों की स्थिति का व्यक्ति के जीवन में और उसकी  में महत्लपूर्ण स्थान है। जीवन में कुंडली और ग्रहों का बड़ा महत्व माना जाता हैं। जीवन में आना वाला समय कैसा होगा यह ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता हैं।

इस साल खरमास 16 दिसंबर से लग रहा है। साल में दो बार जब सूर्य, गुरु की राशि धनु व मीन में संक्रमण करता है, उस समय को खर, मल व पुरुषोत्तम मास कहते हैं। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। खर मास आगामी 14 दिसम्बर से शुरू हो रहा है। शास्त्रों में बताया गया है कि सूर्य जबतक गुरू की राशि मीन अथवा धनु में होता हैं

धर्म नगरी वाराणसी के गंगा घाटों पर दोपहर से ही आस्था और श्रद्धा का रेला चल पड़ा। एक तरफ कलकल बहती गंगा तो दूसरी तरफ व्रती महिलाओं का हुजूम। अवसर था सूर्योपासना के महापर्व डाला छठ के तीसरे दिन शनिवार को अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य देने का।

छठ पर्व को सबसे ज्‍यादा बिहार में मनाया जाता है। बिहार में ऐसे कई धार्मिक स्थल हैं, जो धार्मिक स्नान की वजह से ही प्रसिद्ध हैं।

अशुभ फलों से बचने के लिए और अपनी सेहत को अच्छा बनाये रखने के लिये धार्मिक कार्यों में अपना सहयोग देते रहें। इससे आपको किसी तरह के अशुभ फल का सामना नहीं करना पड़ेगा और आपकी सेहत अच्छी बनी रहेगी।

आजतक आप सुबह उठ कर नहाते-धोते हैं और लोटा लेकर पूरब में मुहं कर सूर्य को जल अर्पित करते हैं। लेकिन अब आप को अपनी दिशा बदलनी होगी। क्योंकि सूर्योदय तो पूरब में होता है नहीं है। ऐसा हम नहीं विशेषज्ञ बता रहे हैं।