supreme court

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ के सामने गोपाल सिंह के वकील पीएस नरसिम्हा ने कहा था कि अयोध्या जमीन विवाद मामला पिछले 69 सालों से अटका पड़ा है।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट कठुआ बलात्कार एवं हत्या मामले में पीड़िता के पिता की अर्जी पर याचिका पर सुनवाई करेगा। पीड़िता के पिता ने अपनी अर्जी में निचली अदालत द्वारा दोषियों को सुनायी गयी सजा को बढ़ाने का अनुरोध किया है और एक आरोपी को बरी करने की चुनौती दी गई थी।

कर्नाटक मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा है कि स्पीकर को खुली छूट है कि वह नियमों के हिसाब से फैसला करें। फिर चाहे वो इस्तीफे पर हो या फिर अयोग्यता पर हो।

पिछले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इन रिपोर्ट्स पर सुनवाई की थी। उस वक्त चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने बच्चों के यौन उत्पीड़न मामलों पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाने पर जोर दिया था। आज इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट फिर से सुनवाई करेगा।

सुप्रीम कोर्ट को एक नई और काफी बड़ी बिल्डिंग बुधवार को मिल जाएगी। बुधवार शाम राष्ट्रपति इस नए भवन का उद्धघाटन करेंगे। 12.19 एकड़ में करीब 885 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस बिल्डिंग में 15 लाख 40 हजार वर्ग फीट जगह उपलब्ध होगी।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद बृहस्पतिवार को भारी सुरक्षा के बीच कर्नाटक के 10 बागी विधायकों ने विधानसभा में स्पीकर के आर रमेश कुमार से मुलाकात की। विधायकों ने अपना इस्तीफा कन्फर्म करने के लिए विधानसभा स्पीकर से मुलाकात की।

बागी कांग्रेस-जेडीएस विधायकों की याचिका पर देश की सर्वोच्च अदालत ने स्पीकर से आज ही फैसला करने को कहा है, तो वहीं आदेश आने के बाद अब स्पीकर ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में गोपाल सिंह विशारद एक मूल वादकार भी हैं। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि इस मामले के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एफएम कलीफुल्ला की अध्यक्षता में आठ मार्च को तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई थी।

नरसिम्हा ने कहा कि तीन सदस्यीय समिति को न्यायालय द्वारा सौंपे गये राम जन्मभूमि विवाद के इस मामले में अधिक कुछ नहीं हो रहा है। इस पर पीठ ने जानना चाहा कि क्या आपने शीघ्र सुनवाई के लिये आवेदन किया है। इस पर नरसिम्हा ने सकारात्मक जवाब दिया।

रंगनाथ ने पत्र में लिखा हैं - हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट में वंशवाद और जातिवाद हावी हैं। न्यायधीश के परिवार से ही अगला न्यायधीश होता हैं। साथ ही रंगनाथ ने पत्र में यह भी लिखा कि न्यायधीशों की नियुक्ति का कोई निश्चित मापदंड नही है।