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विश्व महिला दिवस  के मौके पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने अपने उस बयान पर सफाई दी है जिसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपित से पूछा था कि क्या वह पीड़िता के साथ शादी करने के लिए तैयार है। चीफ जस्टिस आफ इंडिया ने कहा है कि...

बेंच का कहना है कि मामले से सभी राज्य प्रभावित होंगे, इसलिए उन्हें भी सुनना जरूरी है। इसलिए बेंच ने कोर्ट को नोटिस जारी किया है। अब इस मामले में कोर्ट 15 मार्च को अगली सुनवाई करेगी।

याचिकाकर्ताओं का वकील अदालत के सामने फारुक के बयान को ज्यों का त्यों पेश नहीं कर सका लेकिन उसने अपने तर्क का आधार बनाया एक भाजपा-प्रवक्ता के टीवी पर दिए गए बयान को ! फारुक अब्दुल्ला ने धारा 370 को हटाने का कड़ा विरोध जरुर किया था

सुप्रीम कोर्ट ने बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की वापसी उत्तर प्रदेश हो पाएगी या फिर वह पंजाब की रोपड़ जेल में ही रहेंगे इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को बलात्कार मामले में आरोपित सरकारी अधिकारी के बारे में अजीबो-गरीब वाकया सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने खुद आरोपित के वकील से पूछा कि क्या आरोपित सरकारी अधिकारी इस मामले में पीडि़ता के साथ विवाह करने को तैयार है। इस पर वकील ने नकारात्मक जवाब दिया तो सुप्रीम कोर्ट ने आरोपित को गिरफ्तारी को जमानत कराने का मौका दिया है। तब तक आरोपित को गिरफ्तार भी नहीं किया जा सकेगा

पिछले साल दिसंबर में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नद्दा ने कार्यक्रम पर हुए हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार से कहा था कि 3 आईपीएस अधिकारियों को रिलीज नहीं करेगी। अब IPS अधिकारीयों को अपने पास प्रतिनियुक्ति पर बुलाने के केंद्र के अधिकार को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने आज खारिज कर दी।

देश की सर्वोच्च अदालत के इस फैसले 2000 से ज्यादा प्रत्याशियों को बड़ा झटका लगा है। इन उम्मीदवारों को कोरोना महामारी की वजह से साल 2020 में अंतिम प्रयास पूरा हो गया था। याचिकाकर्ता की मांग थी कि आयु सीमा को एक बार के उपाय के रूप में हटा देना चाहिए।

साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई जोकि मौजूदा सांसद भी है, उन पर एक महिला ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। मामला गंभीर होने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने खुद इस मामले की जांच कराने का आदेश दिया था।

भूटान के चीफ जस्टिस, आर्मी चीफ और एक शीर्ष कानून अधिकारी को अपदस्थ करने की साजिश रचने का आरोप है। अब पूरे मामले की जांच की जा रही है और हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ भी जारी है।

न्यायमूर्ति सावंत 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में एल्गाकर परिषद के सम्मेलन के सह-संयोजकों में से एक थे। 2002 के गुजरात दंगों की जांच करने वाले पैनल का भी हिस्सा रहे। मिली जानकारी के अनुसार कार्डियक अटैक के कारण उनका निधन हुआ।