Tablighi Jamaat

दिल्‍ली के निजामुद्दीन तबलीगी जमात गतिविधियों में शामिल पाये गये 960 विदेशियों को ब्लैक लिस्टेट कर दिया गया है। इतना ही नहीं इन सभी का वीजा भी रद्द कर दिया गया है। जमात से संबंधित गतिविधियों में लिप्त पाए जाने पर उनका पर्यटन विजा रद्द किया गया है।

तबलीगी जमात से जुड़े हुए लोग पूरी दुनियाभर में फैले हुए हैं। तबलीगी जमात दुनिया के 150 देशों में सक्रिय है, इन देशों में जमातें इस्लाम के प्रचार-प्रसार के लिए जाती हैं।

दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात में हुआ कोरोना वायरस विस्फोट पूरे देश में तबाही मचाने को तैयार है। ऐसे में तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद के खिलाफ मामला दर्ज हो गया और उनकी तलाश की जा रही है, लेकिन पुलिस को अब तक मौलाना साद का कोई सुराग नहीं मिल सका है।

जमात को लेकर सियासी हमले भी शुरू हो गए हैं और इसका इतिहास भी खंगाला जाने लगा है। इस जमात के आतंकी कनेक्शन होने की बात सामने आने पर खुफिया एजेंसियों के भी कान खड़े हो गए हैं।

बुधवार को राजीव गांधी सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल में अफरातफरी मचा दी।जब निजामुद्दीन के तब्लीगी जमात में शामिल एक सदस्य ने अस्पताल की छठी मंजिल से खुदकुशी की कोशिश की।  इस पर स्थित आइसोलेशन वार्ड के कमरे में भर्ती कोरोना संदिग्ध दस मिनट तक कूदने का ड्रामा किया।

दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित तबलीग़ी जमात का मरकज कोरोना बम बन बन गया है, जिसमें आवाज तो नहीं थीं लेकिन धमाका इतना जोरदार हुआ कि भारत के कई राज्य इसकी चपेट में आ गए। तबलीग़ी जमात से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए राज्यों में से एक है, तमिलनाडु। मरकज से राज्य में लौटे 110 लोग कोरोना से संक्रमित हैं। ऐसे में अब तमिलनाडु में संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 234 हो गया है।

दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज का कोरोना कनेक्शन सामने आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। वहीं अब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा तबलीगी जमात के मरकज के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके जांच शुरु कर दी गई है।

अब तक 1300 लोगों को मरकज भवन से निकाला जा चुका है। 334 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, 700 लोगों को क्वारंटाइन सेंटर भेजा गया है। जबकि दो दर्जन से अधिक लोग पॉजिटिव निकले हैं।

तबलीगी जमात का पहला धार्मिक कार्यक्रम भारत में 1941 में हुआ था। इस कार्यक्रम में 25,000 लोग शामिल हुए थे। 1940 के दशक तक जमात का कामकाज भारत तक ही सीमित था, लेकिन बाद में इसकी शाखाएं पाकिस्तान और बांग्लादेश तक फैल गईं।