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अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय की तरफ से इस हमले की पुष्टि भी कर दी गई है। रक्षा मंत्रालय की तरफ से ट्वीट कर बताया गया है कि रविवार को निम्रूज प्रांत के खाशरोद जिले में एएएफ द्वारा तालिबान के एक ठिकाने को टारगेट किया गया।

अफगानिस्तान में बृहस्पतिवार को हुए अलग-अलग आतंकी हमले से चारों तरफ मातम मचा हुआ है। इस हमले में सेना के 6 जवानों सहित लगभग 11 लोगों की मौत हो गई। बता दें, ये हमले ऐसे समय हुए हैं जब वर्षों से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए अफगान नेता कतर में तालिबान से वार्ता कर रहे हैं।

अफगानिस्तान में न तो आतंकी हमलों का सिलसिला थम रहा है, न ही उनसे होने वाली मौतों का। ऐसे में उत्तरी बागलान में एक ऑपरेशन के दौरान कम से कम 6 तालिबानी आतंकी मारे गए और चार अन्य घायल हो गए।

अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को ट्विटर पर अपने बयान में जानकारी दी कि कंधार प्रांत के झेरिया जिले में तालिबान के सात आतंकवादी मारे गए।

गांव में रिक्शे को घुसते ही बच्चों ने उसे घेर लिया जिसके कारण धमाके में बच्चों की मौत हुई है। अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। प्रवक्ता ने जानकारी दी जांच की जा रही है कि आखिर बच्चों को निशाना बनाकर क्यों हमला किया गया।

तालिबान के हमलों के खिलाफ अफगानी सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन किया था। मंत्रालय ने बताया 20 कमांडर हेलमंद के अलग-अलग इलाकों के थे और 45-100 सदस्यों तक के समूहों का नेतृत्व कर रहे थे जबकि कांधार में करीब 40 तालिबानी कमांडर को मार गिराया गया है।

अफगानिस्तान की सेना ने तालिबान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। अफगान सेना ने 3 अलग-अलग स्थानों पर एयर स्ट्राइक किया है जिसमें 29 आतंकी मारे गए हैं।

अमेरिका और तालिबान में अफगान शांति प्रक्रिया को लेकर जारी बातचीत के बीच संयुक्त राष्ट्र(यूएन) ने बड़ा खुलासा किया है। यूएन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि तालिबान और आंतकी संगठन अलकायदा के बीच अभी भी संबंध बने हुए हैं।

अमेरिका ने 7 अक्टूबर 2001 को अफगानिस्तान में अल कायदा को पनाह देने वाले तालिबान के खिलाफ हमला बोला था। ये हमले अमेरिकी में हुए आतंकी हमले के कुछ हफ्ते बाद हुए थे जिनमें करीब 3,000 लोगों की जान चली गई थी।

पाकिस्तान सरकार न सिर्फ तालीबान की मदद कर रही थी, बल्कि अपने विरोधियों को तालीबान के हाथों मरवा भी रही थी। यहां तक कि पाकिस्तानी सरकार ने तालीबान के कुछ लड़ाकों को मिलाकर एक 'डेथ स्क्वॉड' भी बनाने की कोशिश में थी, जो सरकार के विरोधियों का चुन चुन कर खात्मा करती।