Tashi Namgyal

शहीदों की चिताओं पर जुड़ेंगे हर बरस मेले वतन पर मरने वालों का यही बाक़ी निशाँ होगा। वर्ष 1916 में जगदम्बा प्रसाद मिश्र हितैषी ने शहीदों की शहादत को नमन करते हुए यह गौरव गाथा लिखी थी। कारगिल विजय के बीसवें साल में जिस तरह समूचे देश ने कारगिल में शहीद हुए 527 जाबांज जवानों …

बीस साल पहले कारगिल की पहाड़ियों पर भारत पाकिस्तान के बीच हुई लड़ाई में हमने 527 जांबाज जवान खोए। 1363 जवान घायल हुए। सबको नमन। नमन उस ताशी नामग्याल को भी जिसने घुसपैठ की सबसे पहली जानकारी दी थी।