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तृतीया तिथि रविवार को दिन 11:21 बजे के बाद शुरू होगी। जो सोमवार सुबह 9:01 बजे तक रहेगी।  इसलिए शास्त्रोनुसार सोमवार को तृतीया तिथि मानी जाएगी। भगवान शिव और पार्वती का पूजन सुहागिन व कुंवारी दोनों  करती है। शाम 7:54 बजे तक पूजा करना होगा। क्योंकि उसके बाद से भद्रा लग जाएगा।

भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हरितालिका तीज का त्यौहार शिव और पार्वती के पुर्नमिलन की खुशी में मनाया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार भोलेनाथ को पति के रूप में पाने के लिए मां पार्वती ने 107 जन्म लिए। उनके 108वें जन्म में भोले बाबा ने उनके कठोर तप से प्रसन्न हो अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।