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संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र की शुरूआत 17 जून 2020 से होने वाली है। इस सत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के अस्थाई सदस्यता के लिए चुनाव होना है।

कोरोना वायरस महासंकट इस समय दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। यह जानलेना वायरस चीन के वुहान से शुरू हुआ और पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया। इससे निपटने के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद(UNSC) की बैठक बेनतीजा रही।

संयुक्त राष्ट्र में भारतीय दूत सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि हमें खुशी है कि संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के प्रतिनिधियों की ओर से कश्मीर पर लगाए गए बेबुनियाद आरोपों की असलीयत सामने आ गई। पाकिस्तान अपने मंसूबों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कामयाब करने के लिए चीन का इस्तेमाल करता है।

कश्मीर मुद्दे पर चीन अपनी चाल से बाज नहीं आ रहा है। उसने एक बार फिर बड़ी चाल चली है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में एक बार फिर कश्मीर मुद्दे पर बंद कमरे में चर्चा की मांग की है।

कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान (Pakistan) विश्व के अन्य देशों के हस्तक्षेप कराने का प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने हाल में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को पत्र लिख कर कश्मीर में भय का माहौल और तनाव होने की शिकायत की थी। लेकिन अब संयुक्त राष्ट्र ने इस मुद्दे पर करतारपुर कॉरिडोर (Kartarpur) खोलने के प्रस्ताव का स्वागत किया है।

कश्‍मीर को लेकर चीन और पाकिस्तान की चाल फेल हो गई है। संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद(UNSC) के कई सदस्‍यों के विरोध के बाद चीन ने कश्‍मीर मामले पर सुरक्षा परिषद में बहस कराने का अपना प्रस्‍ताव वापस ले लिया है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के सदस्यों के बीच कश्मीर मुद्दे पर शुक्रवार को अनौपचारिक बैठक हुई। यह बैठक बंद दरवाजे में हुई। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी दूत अकबरुद्दीन ने कहा कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना भारत का आंतरिक मामला है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में चीन की मांग पर जम्मू कश्मीर मुद्दे को लेकर बैठक खत्म हो चुकी है। इस बैठक में चीन और पाकिस्तान को तगड़ा झटका लगा है। कश्मीर मुद्दे पर रूस भारत के साथ खड़ा हो गया। रूस ने कश्मीर को लेकर सिर्फ द्विपक्षीय बातचीत का समर्थन किया है। 

वीटो, लैटिन शब्द का अर्थ है "मैं निषेध करता हूं", किसी देश के अधिकारी को एकतरफा रूप से किसी कानून को रोक लेने का यह एक अधिकार है।संयुक्त राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद में, इसके स्थायी सदस्य (संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, रूस और चीन) किसी प्रस्ताव को रोक सकते हैं या सीमित कर सकते हैं।

एशिया-प्रशांत समूह ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 2 साल की अस्थायी सदस्यता के लिए सर्वसम्मति से भारत की उम्मीदवारी का समर्थन किया है। यह भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक जीत है और विश्व मंच पर देश की बढ़ती साख को दिखाता है।