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ईरान द्वारा अमेरिकी सेना का एक ड्रोन मार गिराने और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ट्वीट के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध की आशंका प्रबल हो गई है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ड्रोन गिराने की खबर आने के तुरंत बाद कच्चे तेल की कीमत तीन फीसदी से अधिक उछलकर प्रति बैरल 64 डॉलर पर पहुंच गई।

अमेरिका और ईरान में तनाव के बीच अमेरिका के एक शक्तिशाली ड्रोन को मार गिराया गया है। अमेरिका ने कहा है कि ईरान ने उसके 18 करोड़ डॉलर के शक्तिशाली जासूसी ड्रोन को गिरा दिया है। अमेरिका के बयान के बाद ईरान ने ऐलान किया कि वह जंग के लिए पूरी तरह से तैयार है।

ओमान की खाड़ी में गुरुवार को दो तेल टैंकरों पर संदिग्ध हमला हुआ है जिसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है। इस हमले के लिए अमेरिका ने ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। ईरान ने अमेरिका के इस आरोप को खारिज कर किया है।

अमेरिका ने आरोपियों को चीन में प्रत्यर्पित करने के लिए हांगकांग कानूनों में प्रस्तावित संशोधन को लेकर चिंता व्यक्त की और चेताया है कि इस प्रकार का कदम क्षेत्र की स्वायत्तता को कमजोर कर सकता है और यह मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

विभाग का कहना है कि पीजीपीआईसी पर प्रतिबंध लगाने का लक्ष्य ईरान के सबसे बड़े और सबसे लाभकारी पेट्रोकेमिकल ग्रुप की वित्तीय स्थिति को खराब करना है। यह प्रतिबंध ग्रुप से जुड़ी 39 अन्य छोटी कंपनियों और विदेशों में उसके कारोबार पर भी लागू होगा।

भारत में इस साल के अंत तक मोबाइल फोन कंपनियों के लिए 5 जी यानी फिफ्थ जेनरेशन स्पेक्ट्रम की नीलामी पूरी हो जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि 100 दिनों में 5जी नेटवर्क ट्रायल शुरू हो जाएंगे। भारत में 5 जी टेक्नोलॉजी विकसित करने में चीन की कंपनी हुवावे भी रेस में है।

अमेरिका ने भारत को मिले सामान्य तरजीही प्रणाली (GSP) दर्जे को खत्म कर दिया है, जो पांच जून से लागू हो जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में इसकी घोषणा की है। ट्रंप ने चार मार्च को इस बात की घोषणा की थी कि वह जीएसपी कार्यक्रम से भारत को बाहर करने वाले हैं।

अमेरिका के वर्जीनिया प्रांत में सरकारी इमारत में अंधाधुंध गोलीबारी हुई। इस हमले में 12 लोगों की मौत हो गई जबकि 6 से ज्यादा लोग बुरी तरह घायल हो गए हैं। मिली जानकारी के मुताबिक यह शूटिंग वर्जीनिया बीच म्यूनसिपल सेंटर में की गई।

कूपर 31 मई से दो जून तक ‘शांगरी ला’ वार्ता में शामिल होने के बाद भारत के साथ रक्षा सहयोग एवं शांतिरक्षा पर बात करेंगे जो ट्रम्प प्रशासन की हिंद प्रशांत रणनीति के अनुसार तेजी से बढ़ती अमेरिका-भारत साझेदारी के दो अहम क्षेत्र हैं।

अमेरिका ने चीन के पक्ष में 1979 में ताइवान से सभी कूटनीतिक संबंध तोड़ लिए थे। लेकिन दोनों देशों के बीच अनौपचरिक संबंध बना रहा, फिलहाल यह संबंध काफी मजबूत है।