vaccine

सीरम के सीईओ अदार पूनावाला ने एनआई से बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने पहले 10 करोड़ के टीके भारत सरकार को 200 रुपये की विशेष कीमत पर उपलब्ध कराए हैं। ये भारत सरकार की गुजारिश थी और हम आम आदमी, खासकर गरीबों और स्वास्थ कर्मियों की मदद करना चाहते हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि दोनों दवाएं बराबर असरदार हैं। और डेक्सामेथासोन के साथ दिए जाने पर और भी असरदार पाएं गईं हैं। इन दवाओं का ट्रायल ब्रिटेन समेत छह अलग-अलग देशों में आईसीयू के करीब 800 मरीज़ों पर हुआ था।

हम वाकई ये नहीं जानते हैं कि कोरोना का टीका कितना प्रभावी होगा। अगर यह प्रभावी हुआ भी, तो इस बात की संभावना कम है कि तुरंत ही सब कुछ पहले की तरह हो जाएगा। वैक्सीन को लेकर देश में कई अफवाहें उड़ रही हैं।

वैक्सीनेशन प्वाइंट की संख्या बढ़ाई जा सकती है। सबसे पहले वैक्सीन की डोज़ एक करोड़ हेल्थ वर्कर्स को दी जाएगी। इसके बाद करीब 2 करोड़ फ्रंट लाइन वर्कर्स को दी जाएगी।

डिप्टी चीफ मिनिस्टर केशव प्रसाद मौर्या में देवरिया में कहा कि विपक्ष को वैक्सीन लगवाकर बाहर का रास्ता दिखाएंगे। खैर, सियासत से उलट आम लोगों में भी वैक्सीन को लेकर संशय है।

वैक्सीन लगानी की रफ़्तार अन्य देशों में अभी धीमी ही है। 2020 की समाप्ति तक अमेरिका में करीब 1 फीसदी आबादी को ही वैक्सीन लग पायी थी।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने ट्वीट कर अखिलेश यादव पर निशाना साधा। सिंह ने लिखा- "अत्यंत दुःखद, अखिलेश जी तो कोरोना वैक्सीन गुप्त रूप से लगवा लेंगे, लेकिन अपने प्रशंसकों को गुमराह कर उनके जीवन के साथ खेल रहे हैं।

22 दिसंबर को नीति आयोग के मेम्बर वी.के. पॉल ने मीडिया से कहा था कि फाइजर ने अभी तक अपना डेटा प्रस्तुत नहीं किया है। अन्य दो कंपनियों ने अपना डेटा दिया है