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जिले के कैथी गांव के रहने वाले पप्पू और कल्लू लॉकडाउन के दौरान मेहसाणा से निकले तो उनकी आंखों में खुशी थी। खुशी घर लौटने और अपनों से मिलने की थी।

ट्रेनों में कई खामियां भी सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश में मजदूरों का हंगामा भी देखें को मिला। श्रमिकों का आरोप है कि उन्हें जौनपुर जाना था लेकिन वाराणसी पहुँचा दिए गए। स्टेशन पर जमकर हंगामा हुआ और श्रमिकों ने दूसरे ट्रैक से आ रही ट्रेनों को भी रोकने का प्रयास किया।

कोरोना ने वाराणसी में सेंचुरी लगा दी है। कोरोना पीड़ित मरीजों का आंकड़ा 101 तक पहुंच गया है। तब्लीगी जमात और दवा कारोबारी के बाद अब मुंबई से आने वाले प्रवासी मजदूर अब कोरोना के बड़े कैरियर बन चुके हैं।

वाराणसी में कोरोना के चलते अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से 3 ने तो पिछले एक हफ्ते के अंदर जान गंवाई है। मुख चिकित्साधिकारी के अनुसार शिवाला के रहने वाले पूर्व प्रोफेसर की 15 मई को मेडिकल रि‍पोर्ट आई, जिसके अनुसार वो कोरोना पॉजि‍टि‍व पाए गए।

वाराणसी में ‘काशी लाभ मुक्ति भवन’ नाम का भवन है, जहां पर लोगों की डेथ विश पूरी होती है। 1908 में बने इस भवन में जो भी आता है वो कुछ ही दिनों के अंदर पंचतत्व में विलीन हो जाता है।

कोरोना का दंश झेल रहे बनारसक के लोगों के लिए शनिवार की सुबह दहशत भरी खबर लेकर आई। सुबह एक और कोरोना पेशेंट की मौत की खबर सुनकर लोग शॉक्ड रह गए।

बनारस की जनता को राहत देने के लिए जिला प्रशासन की ओर से डोर स्टेप डिलीवरी की व्यवस्था शुरू की गई। लेकिन भ्रष्टाचार के दीमक ने इस व्यवस्था में भी सेंधमारी कर दी है।

लॉकडाउन 4.0 के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कोरोना का संकट गहराने लगा है। गुरुवार को कोरोना के चलते दूसरी मौत होने से हड़कम्प मच गया।

प्रवासी मजदूरों की घर वापसी को लेकर केंद्र और राज्य की सरकारें लगातार कोशिश कर रही हैं। श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन चलाई जा रही हैं तो बसों के जरिये भी मजदूरों को वापस भेजने का काम हो रहा है।

कोरोना काल में लोगों को घरों में रहने की नसीहत दी जा रही है। लोगों को अधिक से अधिक समय घर में रहने को कहा जा रहा है। लेकिन सरकार की इस अपील का लोगों की सेहत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है।