ventilators

कोरोना वायरस संकट से लड़ने के लिए पीएम केअर्स फंड से दो हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। केंद्र की ओर से मंगलवार को इस बात की जानकारी दी गई।

कोरोना वायरस संकट के बीच  तेलंगाना के हेल्थ मिनिस्टर एटाला राजेंद्र ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हेल्थ मिनिस्टर राजेंद्र ने कहा कि केंद्र से एक हजार वेंटिलेटर मांगे गए थे लेकिन सिर्फ 50 वेंटिलेटर दिया गया। 

देश में कोरोना वायरस का संक्रमण दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।  सबसे ज्यादा गुजरात महाराष्ट्र, और तमिलनाडू दिल्ली प्रभावित है। इससे रोकने के लिए राज्य सरकारें कटिबद्ध है। अपने अपने तरीके से काम कर रही है। इसमें केंद्र से भी राज्य सरकारों को मदद मिल रहा है।

कोरोना महामारी में वेंटिलेटर्स की बड़ी जरूरत पड़ रही है। दरअसल, जब बीमारी के कारण फेफड़े काम करना बंद कर देते हैं तो वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है।

बताते चलें कि आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर अमिताभ बंद्योपाध्याय के नेतृत्व में समग्र पर्यवेक्षण के तहत नोका रोबोटिक्स ने गंभीर रूप से बीमार COVID-19 रोगियों को जीवनदान देने के लिए आवश्यक उच्च-स्तरीय स्वदेशी वेंटिलेटर को डिजाइन और विकसित किया।

कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को रोकने और संक्रमित मरीजों को स्वस्थ कराने के उद्देश्य से सरकार ने अहम फैसले लिए। इसके तहत सरकार ने मास्क, वेंटिलेटर की बड़ी संख्या में सप्लाई का आर्डर दिया है। 1.7 करोड़ PPE के भी ऑर्डर दिए गए है। सरकार ने इनका आर्डर घरेलू निर्माताओं को दिया है, जिसकी सप्लाई भी शुरू हो गयी है।

देश में कोरोना वायरस का संकट बढ़ता ही जा रहा है। अब इस बीच भारत ने पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट्स (PPEs) किट्स, N95 मास्क और वेंटिलेटर्स के आयात पर ध्यान देना शुरू कर दिया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स को वेंटिलेटर्स बनाने को कहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि ऑटोमोबाइल कंपनियों ने इस संबंध में काम करना शुरू कर दिया है।