vikas dubey

अपराधी विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में उनके ऊपर दर्ज मुकदमे को गलत बताते हुए मुकदमा रद्द किए जाने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की जिसमें उनके अधिवक्ता प्रभाशंकर मिश्र के द्वारा कहा गया है

जय बाजपेई ने बिकरू कांड के बाद विकास दुबे और उसके साथियों को फरार कराने के लिए जिन लग्जरी कारों को भेजा था उन कारों के साथ जय ने अपनी फेसबुक पर 3 फोटो पूर्व में फेसबुक पर अपलोड की थी। जिनको लेकर पुलिस ने फेसबुक कंपनी को मेल कर जानकारी मांगी है

विकास दुबे का नाम बिकरू गांव में बड़ी ही दबी जबान से लिया जाता था और उसकी सीधी वजह थी उसका अपराधी चरित्र। इस गांव में पंचायत चुनाव तो हर बार होते थे लेकिन जीतने वाला प्रत्याशी हर बार विकास दुबे का ही होता था, इतना ही नहीं प्रत्याशी हर बार निर्विरोध चुना जाता था।

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट कहा है कि इन सभी अधिकारियों ने विकास दुबे की अवैध संपत्ति बनाने में सहायता की है। एसआईटी ने सरकार को अपनी 3100 पेज की रिपोर्ट दी है जिसमें कहा है कि इन सभी अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए और कानून के तहत सजा देनी चाहिए।

एसआईटी ने करीब 3200 पन्नों की जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी है । जिसमें 700 पन्ने ऐसे हैं जिसमें दोषी पाए गए अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की भूमिका के अलावा करीब 36 संस्तुतियां भी की गई है। इस जांच में कानपुर के तत्कालीन 80 अधिकारियों व कर्मचारियों को दोषी पाया गया है।

पुलिस ऐसा क्यों कर रही है, इस प्रश्न के जवाब में एक कर्मचारी ने बताया कि विकास दुबे से पहले भदोही के एक विधायक भी वांछित चल रहे थे। वह भी महाकाल दर्शन करने आए थे।

बिकरु कांड में चल रही जांच के दौरान अपराधी विकास दुबे का खजांची जय बाजपेई को पुलिस ने हिरासत में लेकर बिकरु कांड को लेकर कड़ी पूछताछ करते हुए जेल भेज दिया था।

गौरतलब है कि इसी साल 2 जुलाई को कानपुर में विकास दुबे और उसके गैंग ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया था, जिसमें आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे।

पुलिस कई दिनों से इस गैंग के लीडर की तलाश कर रही थी, पुलिस को आरोपियों में लीडर को तय करने में मुश्किल हो रही थी। शुरुआत में गुड्डन त्रिवेदी और जिलेदार के बीच पुलिस ने लीडर चुनने की बात कर रही थी, लेकिन अब हीरू दुबे को लीडर बनाया गया है।

मध्य प्रदेश पुलिस ने विकास दुबे को उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर से पकड़ा था। यूपी पुलिस का दावा है कि जब एटीएस की टीम विकास दुबे को कानपुर ले आ रही थी तो काफिले में शामिल एक वाहन पलट गया था। मौका देखकर विकास दुबे ने पुलिस की पिस्टल छीनकर फरार होने की कोशिश की जिसके बाद जवाबी फायरिंग में वह मारा गया था।