vikram lander

अभी हाल में ही खबर मिली थी कि नासा के जरिए लैंडर विक्रम से संपर्क साधन की कोशिश की जा रही है। लेकिन अब ये कोशिश शायद अंधेरे के साथ डूब जाएगी। दरअसल, चांद के दक्षिणी ध्रुव पर काली अंधेरी रात होने वाली है, जिसके चलते लैंडर विक्रम से संपर्क करने के लिए की जा रही कोशिशें भी अंधेरे में जा सकती है।

साल 2018 में अमेरिका के मौसम उपग्रह (वैदर सैटेलाइट) को ढूंढ निकालने वाले खगोलविद स्कॉट टायली का कहना है कि विक्रम की तरफ से किसी तरह का कोई जवाब नहीं मिल रहा है। बता दें, विक्रम को नासा के तीन डीप स्पेस नेटवर्क एंटीना लगातार संदेश भेज रहे हैं।

साल 2018 में अमेरिका के मौसम उपग्रह (वैदर सैटेलाइट) को ढूंढ निकालने वाले खगोलविद स्कॉट टायली का कहना है कि विक्रम की तरफ से किसी तरह का कोई जवाब नहीं मिल रहा है। बता दें, विक्रम को नासा के तीन डीप स्पेस नेटवर्क एंटीना लगातार संदेश भेज रहे हैं।

चांद के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के ठंडे क्रेटर्स (गड्ढों) में प्रारंभिक सौर प्रणाली के लुप्‍त जीवाश्म रिकॉर्ड मौजूद है। चंद्रयान-2 विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर का उपयोग करेगा जो दो गड्ढों- मंज़िनस सी और सिमपेलियस एन के बीच वाले मैदान में लगभग 70° दक्षिणी अक्षांश पर सफलतापूर्वक लैंडिंग का प्रयास करेगा।

इसरो के मिशन ऑपरेशन कॉम्प्लेक्स (MOX) की स्क्रीन पर विक्रम लैंडर की लैंडिंग के समय एक ग्राफ नजर आ रहा था, जिसमें विक्रम लैंडर दिख रहा था। इस ग्राफ में तीन रेखाएं दिखाई गई थीं, जिसमें से बीच वाली लाइन पर ही चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर अपना रास्ता तय कर रहा था। वह लाल रंग की लाइन थी।

आज इसमें एक और अपडेट आया। विक्रम को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ है। वह पूरी तरह से सेफ है। अब उससे संपर्क स्थापित करने की कोशिश जारी है।

इसरो के सूत्रों का कहना है कि अभी किसी तरीके से एंटीना को कमांड पकड़ना है। अगर धरती से उसे सीधे या ऑर्बिटर के जरिए सिग्नल रिसीव हो जाते हैं तो उसका थ्रस्टर्स ऑन हो सकता है। थ्रस्टर्स के ऑन होते ही विक्रम एक तरफ से अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है।

क्या तेजी से चांद से टकराने की वजह से लैंडर को कोई नुकसान पहुंचा है, इस सवाल पर सिवन ने कहा है कि वे अभी इस बात को नहीं जानते हैं। प्रयास किया जा रहा है कि जल्द ही इसका पता चले।

चांद पर अब तक सिर्फ तीन देश ही सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग करा पाए हैं। इसमें रूस, अमेरिका और चीन का नाम शामिल है। अगर भारत का ये मिशन पूरा हो जाता तो भारत दुनिया का चांद पर पहुंचने वाला चौथा देश हो जाता। हालांकि, ऐसा नहीं हो पाया।