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मन की शांत व मनोकामना की पूर्ति के लिए ईश्वर की आराधना करते है। ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए साधना को अपनाते है।  ये साधना हम ध्यान या फिर उपवास व व्रत से पूरा करते हैं। इसे मानते हुए किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति  के लिए हम व्रत से देवी देवताओं को प्रसन्न करते हैं।

अभी पितृपक्ष चल रहा है । इसमें श्राद्ध कर्म किए जाते है । लेकिन किसी कारणवश किसी ने अब तक श्राद्ध के नियमों का पालन नहीं किया है तो उसके लिए आश्विन माह में कृष्ण पक्ष एकादशी है इस दिन व्रत कर नियम का पालन करें ते पितरों को मुक्ति मिलती है। इसे इंदिरा एकादशी कहते हैं।

श्री हरि विष्‍णु के 8वें अवतार श्रीकृष्‍ण के जन्‍मोत्सव को जन्‍माष्‍टमी के रूप में मनाया जाता है। इस साल जन्‍माष्‍टमी की तिथि को लेकर लोगों में काफी असमंजस है। लोगों असमंजस में हैं कि जन्‍माष्‍टमी 23 अगस्‍त को मनाई जाए या फिर 24 अगस्‍त को।

कृष्ण जन्माष्टमी या भगवान श्रीकृष्ण की जयंती भद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि (आठवें दिन) को मनाई जाती है। भगवान श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का एक अवतार माना जाता है।

धर्म ग्रंथों में भाद्रमास का बहुत महत्व है। शास्त्रों में इसे कल्याणकारी है। कहते है कि नियमों का पालन कर इस मास में गलतियों का प्रायश्चित भी कर सकते हैं। भाद्र, भद्र से बना है जिसका अर्थ है अच्छा व सभ्य।जो भी नियम से इस माह स्नान ,दान व व्रत करता है, उस पर ईश्वर की कृपा बनी रहती है।

इसके पीछे सिर्फ यही कारण है कि आप पूरी तरह से ईश्वर की भक्ति में डूबे रहें, सिर्फ ईश्वर की पूजा-अर्चना करें। देखा जाए तो बदलते मौसम में जब शरीर में रोगों का मुकाबला करने की क्षमता यानी प्रतिरोधक शक्ति बेहद कम होती है, तब आध्यात्मिक शक्ति प्राप्ति के लिए व्रत करना, उपवास रखना और ईश्वर की आराधना करना बेहद लाभदायक माना जाता है।

देवशयनी एकादशी व्रत की शुरुआत दशमी तिथि की रात्रि से ही हो जाती है। दशमी तिथि की रात्रि के भोजन में नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए। अगले दिन प्रात: काल उठकर स्नान कर  व्रत का संकल्प करें भगवान विष्णु की प्रतिमा को आसन पर आसीन कर उनका षोडशोपचार सहित पूजन करना चाहिए। 

भैरव जी की पूजा व भक्ति से भूत, पिशाच एवं काल भी दूर रहते हैं। सच्चे मन से जो इस भैरव जी की पूजा करता है और शुद्ध मन से उपवास करता है, उनके सभी कष्ट कट जाते हैं। साथ ही रुके हुए कार्य अपने आप बनते चले जाते हैं।

जयपुर:पौष मास में शुक्ल पक्ष एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहते हैं।माना जाता है कि इस एकादशी के व्रत के समान दूसरा कोई व्रत नहीं है। जिन्हें संतान होने में बाधाएं आती हैं उन्हें पुत्रदा एकादशी का व्रत जरूर रखना चाहिए। इस उपवास को रखने से संतान संबंधी हर चिंता और समस्या का निवारण हो जाता …

जयपुर:लड़का हो या लड़की विवाह का दोनों की जिंदगी में समान महत्व होता है। और विवाह यदि सही समय पर हो जाए तो इससे अच्छी कोई बात नहीं होती है। लेकिन कई बार कुंडली दोष, उम्र अधिक होने के कारण, या अन्य समस्याओं के कारण समाय से शादी नहीं हो पाती है। ऐसे में जल्दी …