vrat

आज चैत्र शुक्ल तृतीया का पावन पर्व हैं जिसे गौरी तीज या गणगौर के रूप में जाना जाता हैं। ‘गण’ का अर्थ है शिव और ‘गौर’ का अर्थ पार्वती है। इस दिन को सौभाग्य तीज के नाम से भी जाना जाता है। आज के दिन सुहागन महिलाएं अपने सुहाग के प्यार के लिए और अविवाहित लड़कियां अच्छे वर के लिए यह व्रत रखती हैं।

चैत्र नवरात्रि शुरू हो गई है। घर में पूजा पाठ व मां का आगमन हो चुका है। लोग अपने- अपने तरीके से देवी मां को प्रसन्न कर रहें। नवरात्रि के दौरान ज्यादातर घरों में साधक दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं । कहते हैं कि इस पाठ को करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है, लेकिन इसको करने के कुछ विशेष नियम है,

सकट चौथ व्रत आज मनाया जा रहा है। इसे संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने परिवार की सुख और समृद्धि के लिए निर्जल व्रत रखती है और गणेश जी की बड़े ही धूमधाम से पूजा करती है। जिससे परिवार पर कभी भी किसी तरह की कोई समस्याएं न आए

पौष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी का पावन व्रत रखा जाता है। श्री हरि भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत संतान प्राप्ति के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी व्रत के समान दूसरा कोई व्रत नहीं है।

पौष मास में कृष्ण पक्ष एकादशी को सफला एकादशी कहा जाता है। यह साल की आखिरी एकादशी होती है। इस साल सफला एकादशी 22 दिसंबर को है। इस एकादशी का नाम सफला एकादशी इसलिए है क्योंकि इस एकादशी पर व्रत करने से हर कार्य सफल होता है। 

कल यानि 12 दिसंबर 2019 का दिन हिंदू पंचांग में बहुत महत्व रखता है। इस दिन मार्गशीर्ष पूर्णिमा है। धर्मानुसार पूर्णिमा को विशेष तिथि के रूप में देखा जाता है। हर माह की शुक्ल पक्ष की आखिरी तिथि पूर्णिमा कहलाती है। ज्योतिषानुसार, इस पूर्णिमा की रात को चंद्रमा भी ग्रहों की मजबूत स्थिति में रहता है।

देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं।और इस दिन से शुभ कार्य का आरंभ होता है। श्रीविष्णु की पूजा विधि-विधान की जाती है। देवउठनी एकादशी 08 नवंबर को है। इस दिन उपवास रखने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मोक्ष का मार्ग खुलता है।

प्रकृति पर्व छठ केवल सामान्य आस्था का पर्व ही नहीं है बल्कि व्यापक स्तर पर लोक आस्था का महापर्व है। छठ पर्व केवल बिहार और यूपी तक ही सीमित नहीं रहा है। छठ यानि लोक आस्था का यह पर्व अब देश-विदेशों में भी मनाया जाने लगा है। 31OCT: इन राशियों को मिलेगा उपहार, जानिए आज …

सूर्य की उपासना का महापर्व है छठ। छठ एक ऐसा महापर्व है जिसे लगातार चार दिनों तक पूरी आस्था और विश्वास के साथ मनाया जाता है। साथ ही छठ पर्व में कठोर नियमों का पालन भी किया जाता है। इसी कड़ी में जानिए छठ से जुड़ी कुछ मान्यताएं और इस व्रत के लाभ ।

मन की शांत व मनोकामना की पूर्ति के लिए ईश्वर की आराधना करते है। ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए साधना को अपनाते है।  ये साधना हम ध्यान या फिर उपवास व व्रत से पूरा करते हैं। इसे मानते हुए किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति  के लिए हम व्रत से देवी देवताओं को प्रसन्न करते हैं।