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आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच जंग में अब तक 30 हजार लोगों की मौत हो गई है। इस बार दोनों के बीच भयानक युद्ध छिड़ा हुआ है। 1990 के दशक में नागोर्नो-काराबाख क्षेत्र में संघर्ष तेज हो गया। दोनों देशों के बीच हुए टकरावों में कई खूनी संघर्ष भी हुआ है।

वांग वेनवेन ने लिखा है कि यदि भारत कोई जंग जीतना चाहता है तो उसे कोविड-19 के खिलाफ युद्ध जीतने पर ध्यान देने की जरूरत है। जिस पर भारत की बुरी तरह से हार हुई है।

चीन ने साउथ चाइना सी में इसी हफ्ते लाइव फायर ड्रिल किया है। चीन का युद्धाभ्‍यास दो दिन चला, जिसमे 100 चीनी सैनिकों ने हिस्‍सा लिया।

हर साल अप्रैल से भारी बर्फ से दोनों रास्ते बंद हो जाते हैं। इतना ही नहीं परिस्थितियों को देखते हुए, भारतीय सेना और पीएलए को अंतर बनाए रखने के साथ-साथ सीमाओं के बिंदुओं पर पोस्ट किया गया है ताकि कोई अप्रिय घटना न घट सके।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट को अगर ध्यान से पढ़ें तो इसमें साफ-साफ लिखा है कि शी जिनपिंग ने मरीन सैनिकों से कहा कि उन्हें तेज गति से जवाब देने, सभी मौसम और इलाके में जंग लड़ने के लिए तैयार रहना है।

अर्मीनिया और अजरबैजान में हो रही जंग में टर्की ने अजरबैजान का साथ देने का एलान किया है। टर्की ने कहा कि वो अजरबैजान का सर्मथन युद्ध के मैदान में भी करेगा।

ईरान के राष्ट्रपति हसन रोहानी का कहना है कि कि इस युद्ध के बाद इलाके की स्थिरता को खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे ही चलता रहा तो पड़ोसी देशों पर भी इसका बड़ा असर दिख सकता है।

पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने पहली बार अपने लद्दाख से सटे तिब्‍बत के नागरी इलाके में सैनिकों के लिए नए आधुनिक बैरक बनाए हैं और भारी तोपें तैनात की हैं।

अजरबैजान ने चेतावनी दी है कि नागरिक ठिकानों पर हमले बंद नहीं हुए तो वह आर्मीनिया में मौजूद सैन्य ठिकानों पर हमले कर उन्हें तबाह कर देगा।

आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच भीषण जंग चल रही है। दोनों देश एक दूसरे पर तोप, मिसाइलों, टैंक और फाइटर जेट से हमले कर रहे हैं। इस हमले से इलाके दहल रहे हैं।