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सोमवार से शुरू लॉकडाउन के चौथे चरण में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई गयी। गाजियाबाद में श्रमिक ट्रेन के लिए वेरिफिकेशन करवाने के लिए हजारों की तादात में मजदूर एक साथ रामलीला मैदान में एकत्रित हुए।

लॉकडाउन, फिजिकल डिस्टेन्सिंग और मजदूरों के पलायन का नतीजा ये हुआ है कि अब कंपनियों ने अपने कारखानों में ऑटोमेशन यानी मशीनों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष में भाजपा सरकारों द्वारा कांग्रेस द्वारा बुक की गई ट्रेनो को परमीशन न देने पर कड़ा एतराज जताते हुये कहा है कि कोरोना महामारी में लॉकडाउन के चलते उत्तर प्रदेश के लगभग दस लाख मजदूर दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं।

बीते बुधवार को मध्यप्रदेश में बड़ा भयानक हादसा हो गया। जिले के कैंट एरिया में एक ट्रक और बस की जबरदस्त टक्कर होने से 8 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि लगभग 50 घायल हैं।

देश भर में लॉकडाउन के चौथे चरण(18मई) की घोषणा होते ही कई हिस्सों में प्रवासी मजदूरों का प्रदर्शन और उग्र हो गया है। प्रवासी मजदूर अपने घर जाने को लेकर पुलिस, प्रशासन पर लगातार दवाब बना रहे हैं।

यूपी-बिहार सीमा से  जुड़ी कुशीनगर सीमा पर सैकड़ों कामगार रुके हुए हैं। उनका आरोप है कि बिहार पुलिस उन्हें अपने प्रदेश में नहीं जाने दे रही है।

लॉकडाउन की घोषणा कर सरकार ने तो फैसला सुना दिया कि जो जहाँ है वहीं रहे। मगर ऐसा करते समय शायद यह अंदाजा नहीं था कि इस फैसले से दिहाड़ी मज़दूरों पर किस तरह आफत का पहाड़ टूटेगा।

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण आई वैश्विक आपदा के बीच पार्टी कार्यकर्ताओं को अपने संगठनात्मक दायित्वों के साथ-साथ सामाजिक दायित्वों को भी पूरी लगन व निष्ठा से निर्वहन करना है।

मध्य प्रदेश के बड़वानी के सेंधवा में भी तीन अलग-अलग हादसों में तीन प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई। ये सभी मजदूर मुंबई से उत्तर प्रदेश जा रहे थे। इन तीन मजदूरों में से दो मजदूर तो पैदल ही मुंबई से अपने घरों के लिए निकल लिए थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि हाॅटस्पाॅट क्षेत्रों में प्रभावी रणनीति बनाकर उसे लागू किया जाए। डोर स्टेप डिलीवरी तथा सप्लाई चेन को सुदृढ़ रखा जाए।