world

एक रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लोर्स हमेशा से लंबा होना चाहते थे। 28 साल के फ्लोर्स मेडिकल के स्टूडेंट हैं। फ्लोर्स ने लिंब लेंथनिंग सर्जरी की मदद से अपने लंबे होने का सपना पूरा कर लिया।

वैक्सीन के डेवलपमेंट में सरकारों, संस्थानों, संगठनों और निजी तौर पर व्यक्तियों ने जबरदस्त पैसा लगाया है। चूँकि कोरोना वैक्सीन को किसी भी हाल में जल्द से जल्द चाहिए था

बिडेन की जीत कुछ वैसी ही है जैसी 1976 के चुनाव में जिमी कार्टर की थी। कार्टर की तरह बिडेन भी एक खास घटना या परिस्थितियों के कारण जीते थे

ईरान और पाकिस्तान में भी इनके पाँच-पाँच लाख लोग बसे हुए हैं। आईएस के कहर के कारण ये लोग पाकिस्तान में शरणार्थी के रूप में जाने पर मजबूर हो गए थे और अधिकतर क्वेट्टा शहर में बसे हुए हैं।

बर्ड फ्लू ज़ूनोटिक बीमारियों का सबसे मुफीद उदाहरण है। सच्चाई तो ये है कि अधिकांश महामारियों का उदगम पक्षियों में पाए जाने वाले इन्फ्लूएंजा वायरस से ही हुआ है।

डॉ सुमति कोवैक्सिन डेवलप करने वाली कंपनी भारत बायोटेक में रिसर्च एंड डेवलपमेंट विभाग की प्रमुख हैं। डॉ. सुमति इसके पहले ज़ीका और चिकनगुनिया के लिए भी वैक्सीन बनाने के मिशन में कामयाब रह चुकीं हैं।

ब्रिटेन के इंपीरियल कॉलेज लंदन के महामारी वैज्ञानिक प्रो. नील फर्गस्न का कहना है कि पहले वाले कोरोना वायरस का बच्चों पर कम प्रभाव पड़ा था।

एक साल पहले न्यूजीलैंड में अंधाधुंध गोलीबारी कर 51 लोगों की हत्या करने वाला शख्स पूरे साल भर तक भारत में घूमता रहा है।

वैक्सीन लगानी की रफ़्तार अन्य देशों में अभी धीमी ही है। 2020 की समाप्ति तक अमेरिका में करीब 1 फीसदी आबादी को ही वैक्सीन लग पायी थी।

यूरोपीय देशों की बात करें तो अब तक फ्रांस, डेनमार्क, स्पेन, स्वीडन, नीदरलैंड्स, आयरलैंड, जर्मनी और इटली में नए स्ट्रेन के मामले सामने आए हैं।