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कोरोना के खिलाफ जंग में भारत के नजरिए से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दुनिया के बड़े देशों की अपेक्षा यहां कोरोना संक्रमण के मामलों की रफ्तार काफी धीमी है। देश में इतनी बड़ी आबादी को देखते हुए इसे बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।

आज लोग किताबों से ज्यादा मोबाइल और कंप्यूटर को समय देने लगे हैं। किताबें मोबाइल पर ही पढ़ी जाने लगी हैं। लेकिन कुछ लोगों को किताबें पढना ही पसंद आता हैं और उनके लिए कई लाइब्रेरी बनी हुई हैं। इस कड़ी में दुनिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी की जानकारी लेकर आए हैं जहां करोड़ों किताबों के साथ ही कई अन्य चीजों का संग्रह भी हैं। तो हैं इन लाइब्रेरी के बारे में।

वैसे तो पूरी दुनिया में इस कोरोना ने अपना संक्रमण फैला रखा है। ऐसे में स्‍पेन में कोरोना वायरस से मरने वालों का आंकड़ा 10,000 पार कर गया है। स्‍पेन में बीते 24 घंटे में रिकॉर्ड 950 लोगों की मौत हो गई।

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए दुनिया के तमाम देशों ने अपने यहां लॉकडाउन का एलान कर दिया है। हालांकि इसका अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है, लेकिन कोई भी देश अपने देश के नागरिकों के स्वास्थ्य को लेकर कोई खतरा मोल लेने को तैयार नहीं है।

 कोरोनावायरस के केस पूरी दुनिया में थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। सब उसी दिन का इंतजार कर रहें है जिस दिन इस वायरस केा खात्मा हो और इसका सटीक इलाज मिल जाए। 199 देशों में लगभग 7 लाख 85 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हैं।

कोरोना वायरस से चीन भले ही उभर चुका हो, लेकिन बाकी दुनिया में अभी इसकी वैक्सीन बनाना बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है। बता दें कि चीन में इस संक्रमण के 81000 से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं, जबकि 3300 लोगों की इससे मौत हो चुकी है।

पूरी दुनिया पर कोरोना वायरस ने आफत मचा के रखी है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि वे प्रिंस हैरी और मेगन मर्केल के सुरक्षा का खर्च नहीं उठाएंगे। इसके बाद हैरी और मेगन ने अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहने का प्लान बदल दिया।

कोरोना वायरस को लेकर चीन के वुहान में रहने वाले लोगों ने दावा किया है कि कोरोना वायरस से सिर्फ उनके शहर में ही 42,000 लोगों की मौत हो गई। ऐसे में चीन सरकार का कहना है कि कोरोना वायरस से पूरे देश में केवल 3300 लोगों की जाने गई।

कोविड-19 या कोरोना वायरस कुछ हफ्तों पहले सुदूर देशों की बीमारी माना जा रहा था लेकिन आज ये भारत में तेजी से पैर पसार रहा है। चंद दिनों में संक्रमित लोगों का आंकड़ा आठ गुना बढ़ चुका है।

कोरोना संकट के कारण पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था मंदी के दौर में प्रवेश कर चुकी है। अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी इस बात को स्वीकार कर लिया है।