yogesh mishra

शहीदों की चिताओं पर जुड़ेंगे हर बरस मेले वतन पर मरने वालों का यही बाक़ी निशाँ होगा। वर्ष 1916 में जगदम्बा प्रसाद मिश्र हितैषी ने शहीदों की शहादत को नमन करते हुए यह गौरव गाथा लिखी थी। कारगिल विजय के बीसवें साल में जिस तरह समूचे देश ने कारगिल में शहीद हुए 527 जाबांज जवानों …

तमाम लोग भले ही अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को महज एक विशिष्ट आयोजन के तौर देख रहे हैं पर सच तो यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में यह आयोजन सबसे ज्यादा फायदा पहुंचाने वाले निर्णायक फैसलों में से एक के तौर पर याद किया जाएगा।

होली पर कुछ भी असंभव संभव हो सकता है। बाबा देवर लग सकते हैं। आप किसी के गले पड़ सकते हैं। किसी को रंग सकते हैं। किसी में रंग भर सकते हैं। इस असंभव के संभव होने की बात इस होली से अगली होली तक सिर्फ रंगों पर ठहर जाए, यह संभव नहीं है। इसलिए इससे आगे क्या-क्या असंभव संभव हो सकता है, यह जानना जरूरी है।

अमेरिका के सुप्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता डा० रिचर्ड बेंकिन ने वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्र से दक्षिण एशिया में मानवाधिकार की स्थिति पर चर्चा की।

  कभी संत कवि कबीर दास ने हिंदू और मुसलमान दोनों के बारे में कहा था कि ‘अरे! इन दोउ ने राह न पाई।‘ तकरीबन छह सौ साल बाद भी दोनों को इस हिदायत की जरूरत महसूस हो रही है। इक्कीसवीं शताब्दी के कालखंड में जब स्त्री मुक्ति, स्त्री विमर्श, स्त्री सशक्तिकरण जैसे सवाल पीछे …

हमारे राजनेता गांधी, दीनदयाल और लोहिया का भारत बनाने में निरंतर असफल हो रहे हैं। सरकारों के दावे चाहे जो हों, लेकिन हकीकत यह है कि समानता का सिद्धांत, समता का सिद्धांत और समान अवसर का सिद्धांत, विशेष अवसर का सिद्धांत, समरस समाज का सिद्धांत तथा सरकार के कल्याणकारी समाज के दावे निरंतर हाशिये पर …

किसी भी विधानसभा चुनाव के नतीजे लोकसभा चुनाव की पटकथा लिखें ऐसा नहीं होता है पर गुजरात के चुनाव में कुछ ऐसा ही था इसीलिए यह चुनाव नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी हो गया। सरकार भले भाजपा के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी की थी पर मोदी के नाम और मोदी के काम के भरोसे ही किसी …

लखनऊ पब्लिक स्कूल में गुरुवार (9 नवंबर) को कोलोजियम 2017 इंटर ब्रांच एथलेटिक मीट का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि newstrack.com के एडिटर इन चीफ योगेश मिश्र ने शिरकत की। एमएलसी कांति सिंह ने फूलों की माला से मुख्य अतिथि का स्वागत किया।

गुजरात में कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की संजीवनी होती है। इस बार भी कांग्रेस ने इसी गलती को फिर दोहराया है।

इन दिनों यूपी के विश्‍वविद्यालयों के परिसर बेहद अशांत हैं। इस अशांति की वजह भी लगभग एक तरह की है। इस पर गंभीरता से सोचा जाना चाहिए।