Newstrack के साथ कीजिये 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन: जानें, इन शिवालयों में क्या है ख़ास

शिवरात्रि के मौके पर NewsTrack.Com आपको भारत के 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन कराने के साथ ही इनसे जुडी ख़ास बातें भी बता रहा है।

Published by Shivani Awasthi Published: February 21, 2020 | 1:39 pm
Modified: February 21, 2020 | 5:15 pm

Celebrate Shivratri With 12 Jyotirlinga in India

लखनऊ: शिवरात्रि के पावन मौके पर शिवालयों में भक्तों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। दूर दराज से कांवड़ लेकर पहुंचे श्रद्धालु भोले बाबा के दर्शन कर उनका जलाभिषेक कर रहे हैं। वैसे तो भारत में कई ऐसे शिव मंदिर हैं, जिनके अपने रहस्य, मान्यताएं और सिद्धि है लेकिन देश के 12 ज्योतिर्लिंगों के बारें में जानना बेहद जरुरी है। हर शिवभक्त इन ज्योतिर्लिंगों का एक बार दर्शन जरूर करना चाहता है। ऐसे में शिवरात्रि के मौके पर NewsTrack.Com आपको इन ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कराने के साथ ही इनसे जुडी ख़ास बातें भी बता रहा है।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (गुजरात)

भारत का पहला ज्योतिर्लिंग गुजरात में है। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को पृथ्वी का भी पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह मंदिर सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित है। इसी क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्णचन्द्र ने यदु वंश का संहार कराने के बाद अपनी नर लीला समाप्त कर ली थी।

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ठाकुरगंज से निकली शिव बारात

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शिवपुराण के अनुसार जब चंद्रमा को दक्ष प्रजापति ने क्षय रोग होने का श्राप दिया था, तब चंद्रमा ने इसी स्थान पर तप कर इस श्राप से मुक्ति पाई थी। ऐसा भी कहा जाता है कि इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं चंद्रदेव ने की थी। विदेशी आक्रमणों के कारण यह 17 बार नष्ट हो चुका है। हर बार यह बिगड़ता और बनता रहा है।

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (आन्ध्र प्रदेश)

श्रीमल्लिकार्जुन ज्योर्तिर्लिंग आन्ध्र प्रदेश के कृष्णा ज़िले में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल पर्वत पर विराजमान हैं। इसे दक्षिण का कैलाश कहते हैं। महाभारत के अनुसार श्रीशैल पर्वत पर भगवान शिव का पूजन करने से अश्वमेध यज्ञ करने का फल प्राप्त होता है। कहते हैं कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने मात्र से ही व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति मिलती है।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (मध्य प्रदेश)

मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी कहे जाने वाली उज्जैन में स्थित भस्मस्वामी महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग बहुत प्रसिद्द शिवालयों में से एक है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की विशेषता है कि ये एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यहां प्रतिदिन सुबह की जाने वाली भस्मारती विश्व भर में प्रसिद्ध है। महाकालेश्वर की पूजा विशेष रूप से आयु वृद्धि और आयु पर आए हुए संकट को टालने के लिए की जाती है। उज्जैन वासी मानते हैं कि भगवान महाकालेश्वर ही उनके राजा हैं और वे ही उज्जैन की रक्षा कर रहे हैं।

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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (मध्य प्रदेश)

मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध शहर इंदौर के समीप स्थित है ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग। नर्मदा नदी के पास ही यह ज्योतिर्लिंग स्थित है, उस स्थान पर है। ऐसे में पहाड़ी के चारों ओर नदी बहने से यहां ऊं का आकार बनता है। यह ज्योतिर्लिंग औंकार अर्थात ऊं का आकार लिए हुए है, इस कारण इसे ओंकारेश्वर नाम से जाना जाता है। इसके पास ही ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग भी है। इन दोनों शिवलिंगों की गणना एक ही ज्योतिर्लिंग में की गई है।

केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग (उत्तराखंड-केदाराथ)

उत्तराखंड में स्थित केदारनाथ बेहद प्रसिद्द धार्मिक स्थल है। यहां स्थित केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में आता है। बाबा केदारनाथ का मंदिर बद्रीनाथ के मार्ग में स्थित है। केदारनाथ समुद्र तल से 3584 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। केदारनाथ का वर्णन स्कन्द पुराण एवं शिव पुराण में भी मिलता है। यह तीर्थ भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। जिस प्रकार कैलाश का महत्व है उसी प्रकार का महत्व शिव जी ने केदार क्षेत्र को भी दिया है।

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भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र)

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पूणे जिले में सह्याद्रि नामक पर्वत पर स्थित है। भीमा नदी के किनारे सहयाद्रि पर्वत पर हैं। भीमा नदी भी इसी पर्वत से निकलती है। भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को मोटेश्वर महादेव या भीमशंकर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर के विषय में मान्यता है कि जो भक्त श्रृद्धा से इस मंदिर के प्रतिदिन सुबह सूर्य निकलने के बाद दर्शन करता है, उसके सात जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं तथा उसके लिए स्वर्ग के मार्ग खुल जाते हैं। भारत में प्रकट हुए भगवान शंकर के बारह ज्योतिर्लिंग में श्री भीमशंकर ज्योतिर्लिंग का छठा स्थान हैं।

विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग (उत्तर प्रदेश)

उत्तर प्रदेश की नगरी काशी नगरी में स्थित विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग को सप्तम ज्योतिर्लिंग कहा गया है। कहा जाता है कि काशी तीनों लोकों में न्यारी नगरी है, जो भगवान शिव के त्रिशूल पर विराजती है। मान्यता ये भी है, कि प्रलय आने पर भी यह स्थान बना रहेगा। इसकी रक्षा के लिए भगवान शिव इस स्थान को अपने त्रिशूल पर धारण कर लेंगे और प्रलय के टल जाने पर काशी को उसके स्थान पर पुन: रख देंगे। काशी सभी धर्म स्थलों में सबसे अधिक महत्व रखती है। इसलिए सभी धर्म स्थलों में काशी का अत्यधिक महत्व कहा गया है।

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त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र )

अष्टम ज्योतिर्लिंग ‘त्र्यंबकेश्वर’ गोदावरी नदी के करीब महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग के सबसे अधिक निकट ब्रह्मागिरि नाम का पर्वत है। इसी पर्वत से गोदावरी नदी शुरू होती है। कहा जाता है कि भगवान शिव को गौतम ऋषि और गोदावरी नदी के आग्रह पर यहां ज्योतिर्लिंग रूप में रहना पड़ा। जिस प्रकार उत्तर भारत में प्रवाहित होने वाली पवित्र नदी गंगा का विशेष आध्यात्मिक महत्त्व है, उसी प्रकार दक्षिण में प्रवाहित होने वाली इस पवित्र नदी गोदावरी का विशेष महत्त्व है।

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग (झारखण्ड)

श्री वैद्यनाथ शिवलिंग का समस्त ज्योतिर्लिंगों की गणना में नौवां स्थान बताया गया है। भगवान श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का मन्दिर जिस स्थान पर अवस्थित है, उसे वैद्यनाथ धाम कहा जाता है। यह स्थान झारखण्ड प्रान्त, पूर्व में बिहार प्रान्त के संथाल परगना के दुमका नामक जनपद में पड़ता है।

नवम ज्योतिर्लिंग ‘वैद्यनाथ’ हैं। यह स्थान झारखण्ड प्रान्त के संथाल परगना में जसीडीह रेलवे स्टेशन के समीप में है। पुराणों में इस जगह को चिताभूमि कहा गया है। भगवान श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का मन्दिर जिस स्थान पर अवस्थित है, उसे ‘वैद्यनाथधाम’ कहा जाता है।

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नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (गुजरात)

गुजरात के बड़ौदा में गोमती द्वारका के समीप स्थित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की महिमा में कहा जाता है कि जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ दर्शन के लिए आता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। धर्म शास्त्रों में भगवान शिव को नागों के देवता कहा गया। ऐसे में उनका एक नाम नागेश भी है। इस स्थान को दारूकावन भी कहा जाता है। द्वारिका पूरी से भी नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की दूरी 17 मील की है।

रामेश्वर ज्योतिर्लिंग (तमिलनाडु)

दशम ज्योतिर्लिंग रामेश्वर तमिलनाडु के रामनाथम जनपद में स्थित है। इसे सेतुबन्ध तीर्थ भी कहा जाता है, क्योंकि मंदिर समुद्र के किनारे स्थित है। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक होने के साथ-साथ यह स्थान हिंदुओं के चार धामों में से एक भी है। इस ज्योतिर्लिंग के विषय में यह मान्यता है, कि इसकी स्थापना स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी। भगवान राम के द्वारा स्थापित होने के कारण ही इस ज्योतिर्लिंग को भगवान राम का नाम रामेश्वरम् दिया गया है।

घृश्णेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र)

ग्यारहवां ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र क्षेत्र के अन्तर्गत दौलताबाद से लगभग अठारह किलोमीटर दूर ‘बेरूलठ गांव के पास है। इसका नाम ‘घृश्णेश्वर’ है। इस स्थान को ‘शिवालय’ भी कहा जाता है। घृश्णेश्वर को लोग घुश्मेश्वर और घृष्णेश्वर भी कहते हैं। बौद्ध भिक्षुओं द्वारा निर्मित एलोरा की प्रसिद्ध गुफाएं इस मंदिर के समीप स्थित हैं। यहीं पर श्री एकनाथजी गुरु व श्री जनार्दन महाराज की समाधि भी है।

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