हनीमून मनाना हो या फिर गर्लफ्रेंड के साथ मस्ती, ये शहर देगा फुल्टू मजा

गंगटोक: सिक्किम की राजधानी गंगटोक रानीपूल नदी के पश्चिम ओर बसा हुआ एक खूबसूरत शहर है। गंगटोक पर नेचर काफी मेहरबान हैं। ऐसे में अगर आप हनीमून का प्लान बना रहे हैं तो ये जगह आपके लिए बेस्ट है।

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वैसे आप गर्लफ्रेंड के साथ भी यहां टूर पर जा सकते हैं। कंचनजंघा शिखर की संपूर्ण शृंखला की सुंदर दृश्यावली यहां से दिखाई देती है। गंगटोक के प्राचीन मंदिर, महल और मठ आपको सपनों की दुनिया की सैर कराएंगे।

आइए जानते हैं गंगटोक के बारे में:

सोमगो झील

गंगटोक से 40 किलोमीटर की दूरी पर यह झील स्थित है। यह झील चारों ओर से बर्फीली पहाडियों से घिरा हुआ है। झील एक किलोमीटर लंबा तथा 50 फीट गहरा है। यह अप्रैल महीने में पूरी तरह बर्फ में तब्‍दील हो जाता है। सुरक्षा कारणों से इस झील को एक घंटे से अधिक देर तक नहीं घूमा जा सकता है।

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जाड़े के समय में इस झील में प्रवास के लिए बहुत से विदेशी पक्षी आते हैं। इस झील से आगे केवल एक सड़क जाती है। यही सड़क आगे नाथूला दर्रे तक जाती है। यह सड़क आम लोगों के लिए खुला नहीं है। लेकिन सेना की अनु‍मति लेकर यहां तक जाया जा सकता है।

लाम्पोखरी (झील) आरिटार

लाम्पोखरी, गंगटोक से लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक झील है। गंगटोक से यहाँ पाक्योंग अथवा रम्फू होते हुए टैक्सी से पहुंचा जा सकता है। झील चारों ओर से पहाड़ियों से घिरी हुई है। झील एक किलोमीटर लंबी तथा 50 फुट तक गहरी है। यहाँ पर अनेक दर्शनीय स्थल हैं।

रुमटेक मठ

रुमटेक घूमे बिना गंगटोक का सफर अधूरा माना जाता है। यह मठ गंगटोक से 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मठ 300 वर्ष पुराना है। रुमटेक सिक्किम का सबसे पुराना मठ है। 1960 के दशक में इस मठ का पुननिर्माण किया गया था।

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इस मठ में एक विद्यालय तथा ध्‍यान साधना के लिए एक अलग खण्‍ड है। इस मठ में बहुमूल्‍य थंगा पेंटिग तथा बौद्ध धर्म के कग्‍यूपा संप्रदाय से संबंधित वस्‍तुएं सुरक्षित अवस्‍था में है। इस मठ में सुबह में बौद्ध भिक्षुओं द्वारा की जाने वाली प्रार्थना बहुत कर्णप्रिय होती है।

दो द्रूल चोर्टेन

यह गंगटोक के प्रमुख आकर्षणों में एक है। इसे सिक्किम का सबसे महत्‍वपूर्ण स्‍तूप माना जाता है। इसकी स्‍थापना त्रुलुसी रिमपोचे ने 1945 ई. में की थी। त्रुलुसी तिब्‍बतियन बौद्ध धर्म के नियंगमा सम्‍प्रदाय के प्रमुख थे। इस मठ का शिखर सोने का बना हुआ है। इस मठ में 108 प्रार्थना चक्र है। इस मठ में गुरु रिमपोचे की दो प्रतिमाएं स्‍थापित है।

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इनहेंची मठ

इनहेंची का शाब्दिक अर्थ होता है निर्जन। जिस समय इस मठ का निर्माण हो रहा था। उस समय इस पूरे क्षेत्र में सिर्फ यही एक भवन था। इस मठ का मुख्‍य आकर्षण जनवरी महीने में यहां होने वाला विशेष नृत्‍य है। इस नृत्‍य को चाम कहा जाता है। मूल रूप से इस मठ की स्‍थापना 200 वर्ष पहले हुई थी। वर्तमान में जो मठ है वह 1909 ई. में बना था। यह मठ द्रुपटोब कारपो को समर्पित है। कारपो को जादुई शक्‍ित के लिए याद किया जाता है।

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