पर्यटन

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी  के तौर पर मनाया जाता हैं। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, इसलिए चारों ओर खुशियाँ मनाई जाती हैं। इस दिन देश के सभी कृष्ण मंदिरों में पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण किया जाता हैं। देश में मथुरा-वृंदावन के अलावा एक मंदिर ऐसा है जहां जन्माष्टमी के दिन आधी रात को भगवान कृष्ण दर्शन देते हैं।ये हैं द्वारिकाधीश मन्दिर ।

अगर आप खाने-पीने के बहुत शौकीन है तो ये जगह आपके लिए ही है. नूडल्स, सोबा, सुसी, मिस सूप, डंपलिंग्स और नॉन वेजेटेरियन मोमोस, जापान की जान है यहां का खाना. खूबसूरत फूल, महल और आकर्षक व्यू सब कुछ यहां पर है।

 शाम होते ही निधिवन को बंद करके लोगों को यहां से बाहर निकाल दिए जाते हैं क्योंकि माना जाता है कि यहां प्रत्येक रात को श्री कृष्ण आकर गोपियों संग रासलीला करते हैं। यदि कोई व्यक्ति इन्हें देखता है तो वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है या उसकी मृत्यु हो जाती है।

बारिश का मौसम है। जो लोग बारिश में घूमने का मजा लेना चाहते है। घूमने का मजा लेते हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे भी है जो बरसात मे घूमना चाहते तो है लेकिन अपने बच्चों की वजह से कहीं नहीं जा पाते हैं तो वो भी घूमने का मजा ले सकते है। जानते है कैसे लें बच्चों के साथ घूमने का असली मजा...

दम ओलाव भी कश्मीर की फ़ेमस डिश है। ये कश्मीर की सबसे फ़ेमस वेजिटेरियन डिश है। वैसे इसे आम भाषा में दम आलू भी कहते हैं। आलू, दही, सोंठ, सौंफ और कई दूसरे गर्म मसालों को मिलाकर बनने वाली यह सब्जी बेहद टैस्ट में बेस्ट होती है।

अंग्रेजों ने यहां स्वतंत्रता सेनानी टंट्या भील को मार कर फेंक दिया था। आज भी यहाँ से गुजरने वाली हर ट्रैन टंट्या मां की समाधी को सलामी देने के बाद ही आगे बढ़ती है।

परम्परागत कश्मीरी दावत को वाज़वान कहा जाता है। कहते हैं कि हर कश्मीरी की ये ख़्वाहिश होती है कि ज़िन्दगी में एक बार, कम से कम, अपने दोस्तों के लिये वो वाज़वान परोसे। कुल मिलाकर कहा जाये तो कश्मीर हिन्दू और मुस्लिम संस्कृतियों का अनूठा मिश्रण है।

इस अनोखे गंगाजली कलश की एक दिलचस्प बात यह भी है कि इसे इंडिया से ब्रिटेन जिस पानी के जहाज से ले जाया गया था, उसे भी पहले गंगाजल से धुला गया था। 

गंगटोक: सिक्किम की राजधानी गंगटोक रानीपूल नदी के पश्चिम ओर बसा हुआ एक खूबसूरत शहर है। गंगटोक पर नेचर काफी मेहरबान हैं। ऐसे में अगर आप हनीमून का प्लान बना रहे हैं तो ये जगह आपके लिए बेस्ट है। यह भी पढ़ें: अब अयोध्या मामले पर 6 अगस्त से होगी रोजाना सुनवाई वैसे आप गर्लफ्रेंड के …

मनाली के बौद्ध मठ बहुत लोकप्रिय हैं। कुल्लू घाटी के सर्वाधिक बौद्ध शरणार्थी यहां बसे हुए हैं। यहां का गोधन थेकचोकलिंग मठ काफी प्रसिद्ध है। साल 1969 में इस मठ को तिब्बती शरणार्थियों ने बनवाया था।