पर्यटन

हमारे देश में धर्म से जुड़ी कई रहस्य व परंपराएं है। जिसपर हम चाहे न चाहे विश्वास करते हैं। खासकर धर्म से जुड़े बातों पर तो हम सब लोग आंखमूंद कर विश्वास करते है। हिंदू धर्म के जितने भी प्राचीन धार्मिक स्थल है वहां कोई ना कोई रहस्य जरूर है। ऐसे ही एक धार्मिक स्थल की बात कर रहे हैं

खाने और घूमने के शौकीनों के लिए देश के उन शहरों के खाने के स्टॉल की बात करते हैं, जहां आप एक बार जाए तो वहां जरूर जाकर स्वाद लें। जो अपने खास जायके के साथ ही अपने नाम से जानी जाती हैं। ये जगह चाहे,जयपुर हो या हैदराबाद ये हैं इंडिया के फेमस फूड कॉर्नर, नहीं चखा होगा

धर्म को लेकर प्राचीन समय से लोग संवेदनशील रहे है। धर्म के नाम पर घार्मिक स्थल बनाने की परंपरा भी पुरानी है। इसके साक्ष्य भी मिलते रहते है। कुछ ऐसा ही सामने आया है इजिप्ट से। इस शहर के हेराक्लिओन में समुद्र के अंदर लगभग 1200 साल पुराना मंदिर मिला है।

अब आप ही बताइए, जब कोई छुट्टी लेता है, तो वह सुकून और शांति वाली जगहों पर जाना चाहता है। ऐसे में जब हम टीवी पर समुद्र के किनारे देखते हैं, तो दिल करता है कि पानी की वो ठंडी लहरें काश हमारे पैरों को छू पाती।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महादेव शिवशंकर स्वयं प्रगट हुए है। उनकी लिंग रुप में भी पूजा होती है और भगवान शिवलिंग रुप में 12 स्थानों पर विराजमान है। जानते है सावन में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग के बारे में...

मानसून ने धीरे-धीरे अपने आगमन के संकेत दे दिए हैं और तापमान में कमी आने लगी हैं। जिसके चलते सैलानियों की संख्या में इजाफा होने लगा हैं।राजस्थान को अपनी विशेष संस्कृति और प्राकृतिक नजारों के लिए भी जाना जाता हैं जो यहां के पर्यटन को बढ़ावा देते हैं। मॉनसून का सीजन आ चुका हैं और इस मौसम में राजस्थान घूमने का आपना अलग ही मजा हैं।

बारिश के दिनों में मंदिर के पास के झरनों की रिमझिम फुहार देखने का अपना ही आनंद है। यहां पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य का बहुत आनंद उठाते हैं। घटारानी जतमई से 25 कि.मी. है। यह भी बेहतरीनवाटरफाल्स  जलप्रपात है।

रूस की कुड़ियां भी बेहद खूबसूरत होती हैं। यहां कुड़ियों को उनकी सुंदर चमकती साफ त्वचा के लिए जाना जाता है। इनकी नीली चमकती आंखें बेहद प्रभावशाली लगती हैं।

अलग-अलग जगहों पर होने वाले इन फेस्टिवल्स में शामिल होकर उस जगह, वहां की संस्कृति, खानपान और भी कई दूसरी चीज़ों से रूबरू होने का मौका मिलता है। क्योंकि जुलाई माह से मानसून की शुरुआत होती है।ऐसे में सुहावना मौसम इन फेस्टिवल की रौनक को दोगुना करता है।

पूरे देश में केवल दो ही मूर्तियां इस पत्थर की बनी हैं। एक मां काली की और एक डासना देवी की। ये पत्थर कसौटी पत्थर कहलाता है। स्वामी जगदगिरि महाराज ने सरोवर से प्रतिमाओं को निकाल कर पुन: मंदिर में स्थापित करवाया था।