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पृथ्वी का पहला ऐसा मंदिर, 'गार्ड ऑफ़ ऑनर' दिया जाता है दिन में चार बार

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 29 July 2018 5:29 AM GMT

पृथ्वी का पहला ऐसा मंदिर, गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया जाता है दिन में चार बार
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झांसी: यहां एक ऐसा मंदिर है, जहां श्रीराम को भगवान नहीं बल्क‍ि राजा माना जाता है। उन्हें पूरे दिनभर में 4 बार गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। इसके लिए पुलिसकर्मी की तैनाती की जाती है। पिछले 400 सालों से यह प्रथा चली आ रही है। लोगों का मानना है कि भगवान उनके यहां आज भी राज करते हैं।

newstrack.com आज आपको इस मंदिर की अनटोल्ड स्टोरी के बारे में बता रहा है।

शासन-प्रशासन के जिम्मे है मंदिर की देखभाल

झांसी से 20 किलोमीटर दूर मध्य की सीमा पर बेतवा नदी किनारे स्थित ओरछा में भगवान राम का मंदिर है। इसे राम राजा सरकार के नाम से जाना जाता है। ओरछा विदेशी सैलानियों के लिए बड़ा पर्यटन स्थल है। लाखों की संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। मंदिर की जिम्मेदारी शासन प्रशासन के जिम्मे है। नायब तहसीलदार इसके व्यवस्थापक होते हैं। इसके साथ ही मंदिर का स्टाफ रखा जाता है, जिसमें क्लर्क-भंडारी शामिल होते हैं। दर्जनों पुजारी यहां कार्यरत हैं। इन्हें शासन द्वारा बाकायदा तनख्वाह दी जाती है। सुरक्षा के लिए 2 दर्जन सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं।

यहां रोजाना एक पुलिसकर्मी भगवान राम को सलामी देता है। मंदिर के अन्दर किसी को भी फोटो लेने की अनुमति नहीं है। राम बरात के दौरान 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी और एक पुलिस अधिकारी भगवान राम को सलामी देता है।

तो इसलिए भगवान राम को माना जाता है राजा

कहा जाता है कि भगवान राम खुद ही यहां के राजा बनना चाहते थे। करीब 400 साल पहले साल 1554 से 1594 तक राजा मधुकर शाह ओरछा राज्य के राजा थे। उनकी पत्नी रानी कुंवर गणेशी के सपने में आकर भगवान राम ने खुद को भगवान की बजाय राजा कहलवाने की इच्छा जाहिर की थी। राजा मधुकर शाह कृष्ण भक्त थे। एक बार उन्होंने रानी कुंवर गणेशी से वृंदावन चलने को कहा, लेकिन रानी ने जाने से मना कर दिया। इसे लेकर दोनों में बहस हो गई।

इतिहास के अनुसार, राजा ने रानी को चुनौती दी कि अगर राम भगवान हैं, तो उन्हें ओरछा लाकर दिखाओ। इस पर रानी अवधपुरी अयोध्या चली गईं और सरयू नदी किनारे लक्ष्मण किला के पास कड़ी तपस्या की।

एक महीने तपस्या करने के बाद रानी ने थककर सरयू नदी में छलांग लगा दी, लेकिन चमत्कारिक रूप से वह नदी से बाहर पहुंच गईं। इसे राम का ही चमत्कार माना गया। कहा जाता है कि बेहोश स्थिति में रही रानी ने जब आंखें खोली तो भगवान राम उन्हें गोद में बैठे प्रतीत हुए। रानी ने भगवान से प्रार्थना की कि वह ओरछा चलें।

श्रीराम ने रानी के सामने ओरछा आने के लिए तीन शर्तें रखीं। पहली यह कि वह पुख्य नक्षत्र में ही ओरछा के लिए प्रस्थान करेंगे। दूसरा, जहां एक बार बैठेंगे वहीं स्थापित हो जाएंगे। तीसरा, वह ओरछा के राजा कहलाएंगे, जहां उनका राजशाही फरमान चलेगा।

ऐसे पूरी हुई भगवान राम की तीनों शर्त

रानी ने राम को ओरछा लाने की तैयारी की। राम को यहां प्रतिमा के रूप में लाने में उन्हें 8 माह का समय लग गया। इस बीच राजा मधुकर शाह ने एक चतुर्भुज मंदिर का निर्माण कराया। इसी मंदिर में भगवान राम को स्थापित करने की तैयारी थी। मंदिर में स्थापना से पहले राम राजा को मंदिर के गर्भगृह में रखा गया। जब उन्हें गर्भगृह से चतुर्भुज मंदिर ले जाने की कोश‍िश की गई, तो शर्ता के अनुसार वह पहले स्थान पर ही स्थापित हो गए। उन्हें कोई उठा ही नहीं पाया।

भगवान राम की इच्छा के अनुसार इस मंदिर को राम राजा सरकार का नाम दिया गया और तभी से श्रीराम को ओरछा का राजा घोषित कर दिया गया।

Aditya Mishra

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