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खास खबर : कैसे हुई हज की शुरुआत, 15 पॉइंट्स में जानिए पूरी कहानी

Rishi

RishiBy Rishi

Published on 20 Aug 2018 10:32 AM GMT

खास खबर : कैसे हुई हज की शुरुआत, 15 पॉइंट्स में जानिए पूरी कहानी
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रियाद : रविवार से हज यात्रा आरंभ हो चुकी है। पवित्र इस्लामिक शहर मक्का के पास स्थित मीना में तारवियाह (हज का पहला दिन) के लिए 20 लाख से अधिक हजयात्री रूके। इसके बाद हज यात्री सोमवार सुबह अराफात के लिए मीना से रवाना हुए। हजयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

इस बीच सऊदी स्वास्थ्य मंत्रालय ने हजयात्रियों की सुरक्षा के लिए सभी स्थलों पर 25 अस्पतालों और 155 स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था की है। इसके साथ ही 5,000 बिस्तरों, 180 एंबुलेंस और 100 वाहनों का बंदोबस्त किया गया है, जो मोबाइल मेडिकल यूनिट में तब्दील होने में सक्षम हैं।

इस मौके पर जानते हैं क्यों की जाती है हज

  1. हज एक इस्लामी तीर्थयात्रा और मुस्लिम लोगों का पवित्र शहर मक्का में प्रतिवर्ष होने वाला विश्व का सबसे बड़ा जमावड़ा है।
  2. यह इस्लाम के पांच मूल स्तंभ में से एक है।
  3. हज तीर्थयात्रा में मुस्लिम मक्का और उसके नजदीकी पवित्र स्थलों अराफात, मीना और मुजदलिफा जाते हैं।
  4. यह एक धार्मिक कर्तव्य है जिसे अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार पूरा करना हर उस मुस्लिम चाहे स्त्री हो या पुरुष का कर्तव्य है जो सक्षम शरीर होने के साथ साथ इसका खर्च भी उठा पाने में समर्थ हो।
  5. शारीरिक और आर्थिक रूप से हज करने में सक्षम होने की स्थिति को इस्ति'ताह कहा जाता है और वो मुस्लिम है जो इस शर्त को पूरा करता है मुस्ताती कहलाता है।
  6. हज मुस्लिम लोगों की एकजुटता का प्रदर्शन होने के साथ साथ उनका अल्लाह (ईश्वर) में विश्वास होने का भी द्योतक है।
  7. यह तीर्थयात्रा इस्लामी कैलेंडर के 12 वें और अंतिम महीने धू अल हिज्जाह की 8 वीं से 12 वीं तारीख तक की जाती है।
  8. इस्लामी कैलेंडर एक चंद्र कैलेंडर है इसलिए इसमें, पश्चिमी देशों में प्रयोग में आने वाले ग्रेगोरियन कैलेंडर से ग्यारह दिन कम होते हैं, इसीलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार हज की तारीखें साल दर साल बदलती रहती हैं।
  9. इहरम वो विशेष आध्यात्मिक स्थिति है जिसमें मुसलमान हज को दौरान रहते हैं।
  10. 7 वीं शताब्दी से हज इस्लामी पैगंबर मुहम्मद के जीवन के साथ जुड़ा हुआ है, लेकिन मुसलमान मानते हैं कि मक्का की तीर्थयात्रा की यह रस्म हजारों सालों से यानि कि इब्राहीम के समय से चली आ रही है।
  11. तीर्थयात्री उन लाखों लोगों के जुलूस में शामिल होते हैं जो एक साथ हज के सप्ताह में मक्का में जमा होते हैं।
  12. यहां कई अनुष्ठानों में हिस्सा लेते हैं। प्रत्येक व्यक्ति एक घनाकार इमारत काबा के चारों ओर वामावर्त सात बार चलता है जो कि मुस्लिमों के लिए प्रार्थना की दिशा है।
  13. यात्री अल सफा और अल मारवाह नामक पहाड़ियों के बीच आगे और पीछे चलता है। ज़मज़म के कुएं से पानी पीता है। चौकसी में खड़ा होने के लिए अराफात पर्वत के मैदानों में जाता है और एक शैतान को पत्थर मारने की रस्म पूरा करने के लिए पत्थर फेंकता है। उसके बाद तीर्थयात्री अपने सर मुंडवाते हैं, पशु बलि की रस्म करते हैं और इसके बाद ईद उल-अधा नामक तीन दिवसीय वैश्विक उत्सव मनाते हैं।
  14. पैगंबर इब्राहिम के बेटे हजरत इस्माइल और इब्राहिम की बीवी हजरत हाजिरा एक रेगिस्तान में भटक गए थे। हजरत इस्माइल प्यास से तड़प रहे थे। अपने बेटे की जान बचाने के लिए हजरत हाजिरा पानी की तलाश में साफा और मारवा पहाड़ियों के बीच दौड़ लगा रही थीं। थककर वह जमीन पर गिर पड़ीं और अल्लाह से गुहार लगाई। तभी हजरत इस्माइल ने जमीन पर अपना पैर पटका और पानी निकल आया। हजरत हाजिरा और हजरत इस्माइल की जान बच गई। इस जगह से निकलने वाले पानी को आब-ए जमजम कहा जाता है।
  15. अल्लाह ने पैगंबर इब्राहिम को तीर्थस्थान बनाने का हुक्म दिया। अल्लाह के हुक्म को मानते हुए हजरत इब्राहिम और हजरत इस्माइल ने यहीं पर पत्थर से एक निर्माण करवाया जो दुनिया में काबा के नाम से मशहूर हुआ।

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आशीष शर्मा ऋषि वेब और न्यूज चैनल के मंझे हुए पत्रकार हैं। आशीष को 13 साल का अनुभव है। ऋषि ने टोटल टीवी से अपनी पत्रकारीय पारी की शुरुआत की। इसके बाद वे साधना टीवी, टीवी 100 जैसे टीवी संस्थानों में रहे। इसके बाद वे न्यूज़ पोर्टल पर्दाफाश, द न्यूज़ में स्टेट हेड के पद पर कार्यरत थे। निर्मल बाबा, राधे मां और गोपाल कांडा पर की गई इनकी स्टोरीज ने काफी चर्चा बटोरी। यूपी में बसपा सरकार के दौरान हुए पैकफेड, ओटी घोटाला को ब्रेक कर चुके हैं। अफ़्रीकी खूनी हीरों से जुडी बड़ी खबर भी आम आदमी के सामने लाए हैं। यूपी की जेलों में चलने वाले माफिया गिरोहों पर की गयी उनकी ख़बर को काफी सराहा गया। कापी एडिटिंग और रिपोर्टिंग में दक्ष ऋषि अपनी विशेष शैली के लिए जाने जाते हैं।

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