मुमताज महल के अलावा शाहजहां की थीं तीन और बेगमें, कुछ यूं गुमनाम सी है उनकी कहानी

Published by Published: April 23, 2017 | 10:50 am
Modified: April 23, 2017 | 12:43 pm

आगरा: जहां बेपनाह मोहब्बत की मिसाल ताजमहल को शाहजहां ने मुमताज के नाम किया, वहीं उसी मुग़ल शंहशाह शाहजहां की तीन बेगम और थीं, जो आज भी गुमनाम हैं। इनमें से फतेहपुरी और सरहिंदी बेगम के मकबरे ताज परिसर में ही बने हैं, जबकि तीसरा कंधारी बेगम का मकबरा ताज पूर्वी गेट के नजदीक स्मारक के बाहर बना हुआ है।

यहां आम दिनों में सैलानियों के प्रवेश पर पाबंदी है। एप्रूव्ड टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन के अध्यक्ष शमसुद्दीन बताते हैं कि मुमताज के अलावा केवल कंधारी बेगम के बारे में ही इतिहास में जानकारी उपलब्ध है। सरहिंदी व फतेहपुरी बेगम के केवल नाम मिलते हैं, उनके बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

वहीं अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. भुवन विक्रम बताते हैं कि तीनों बेगमों के मकबरे सुरक्षा कारणों और स्टाफ की कमी से बंद हैं। दरअसल आज से शाहजहां के तीन दिवसीय परंपरागत 362वां उर्स का आगाज होगा। आज से पर्यटकों के लिए असली कब्रें खोली जाएंगी, जहां आज सबसे पहले गुसल की रसम अदायगी होगी।

फतेहपुरी बेगम: ताज के दक्षिण-पश्चिमी भाग में बना मकबरा फतेहपुरी बेगम का है। स्मारक परिसर के बाहर फतेहपुरी मस्जिद भी बनी है। हाल ही में मकबरे में एएसआई द्वारा संरक्षण कार्य कराया गया है। लाल पत्थरों से बने मकबरे के मध्य बने कक्ष में फतेहपुरी बेगम की कब्र है।

सरहिंदी बेगम: ताज के दक्षिण-पूर्वी भाग में सरहिंदी बेगम का मकबरा है। फतेहपुरी बेगम के मकबरे के समान ही लाल पत्थर से यह बना हुआ है। इसमें भी सीढ़ियां चढ़कर ऊपर जाना होता है। छोटे उद्यान में वाटर चैनल भी हैं और कोने पर मकबरा बना हुआ है।

कंधारी बेगम: ताज पूर्वी गेट से यमुना की तरफ जाने वाले मार्ग पर दायीं तरफ कंधारी बेगम का मकबरा है। यहां मस्जिद भी बनी हुई है। कंधारी बेगम शाहजहां की पहली बेगम थीं। वह मुगल दरबारी मुजफ्फर हुसैन की बेटी थीं। यहां सीढ़ियां होने से लोगों को ऊपर चढ़कर जाना होता था।

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