संगम क्षेत्र की मलिन बस्ती उजाड़ने के मामले में जानकारी तलब

प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयाग संगम क्षेत्र में स्थित मलिन बस्ती के ध्वस्तीकरण पर रोक के बावजूद कार्यवाही करने के खिलाफ दाखिल अवमानना याचिका पर कुम्भ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद से चार दिन में जानकारी मांगी है। राज्य सरकार के अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता के आर सिंह ने कोर्ट को तब तक ध्वस्तीकरण न करने का आश्वासन दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने सामाजिक कार्यकर्ता अंशू मालवीय, अनुराधा व संगम क्षेत्र मलिन बस्ती संघ की अवमानना याचिका पर दिया है। याचिका पर के के राय व
स्मृति कार्तिकेय ने बहस की।

याची का कहना है कि 2000 में याचिका दाखिल हुई। बस्ती के ध्वस्तीकरण को चुनौती दी गयी। कोर्ट ने मलिन बस्ती को उजाड़ने पर रोक लगा रखी है। पुनः 2017 में ध्वस्तीकरण की नेाटिस जारी की गयी तो अवमानना याचिका दाखिल की गयी। जिलाधिकारी ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि नोटिस वापस ले ली गयी है और 321 परिवारों को बसाने की व्यवस्था की जा रही है। कोर्ट के आदेश के बावजूद 5/6 अक्टूबर 18 को भारी पुलिस बल भेज बस्ती उजाड़ना शुरू कर दिया है।

याची का कहना है कि जिलाधिकारी ने परिवारों को चिन्हित किया है। उन्हें अन्यत्र बसाने के बजाए उजाड़ा जा रहा है। याचिका की सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी।

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कोर्ट की अन्य खबरें

कैदी की जेल में मौत की जांच की मांग मेें याचिका

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केन्द्रीय कारागार नैनी में आजीवन कारावास की सजा भोग रहे कैदी राम नारायण कुशवाहा की समय से इलाज न कराने से हुई मौत मामले में राज्य सरकार व जेल अधीक्षक से चार हफ्ते में जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति बी. के. नारायण तथा न्यायमूर्ति आर. एन. कक्कर की खण्डपीठ ने मृतक कैदी की पत्नी श्रीमती शकुन्तला देवी की याचिका पर दिया है।

याचिका पर अधिवक्ता चार्ली प्रकाश व के के राय ने बहस की। याची का कहना है कि जेल में कैदी लम्बे समय से बीमार चल रहा था। जेल में
जब उसकी मौत हो गयी तब जेल अधिकारियों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक शरीर पर कई चोटों के निशान पाए गए। याचिका में कैदी की अप्राकृतिक मौत की निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच कराये जाने की मांग की गयी है। याची का कहना है कि मौत की उच्च स्तरीय जांच कराकर कोर्ट में निश्चित समयावधि में रिपोर्ट पेश की जाए। याचिका की सुनवाई छह हफ्ते बाद होगी।

पतंजलि आयुर्वेद को राहत, पेड़ों का मुआवजा देने का निर्देश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नोएडा गौतम बुद्धनगर स्थित बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद प्रा. लि को बड़ी राहत दी है। कम्पनी पर तीन हजार से अधिक पेड़ काटने के आरोप में दाखिल औसाफ व अन्य की याचिका यह कहते हुए निस्तारित कर दी है कि याचीगण को मुआवजा पाने का कानूनी अधिकार है। वह जिलाधिकारी के समक्ष अर्जी दाखिल करें और जिलाधिकारी काटे गये पेड़ों का पता लगाकर नियमानुसार याचियों को मुआवजे का भुगतान कराये।

कोर्ट ने कहा है कि राजस्व संहिता नियमावली के नियम 55(3) के तहत यदि जमीन पट्टे पर देने के बाद सरकार वापस लेती है तो उसे इस दौरान जमीन पर किये गये विकास का मुआवजा देना होगा। जिसके तहत याचियों को जांच कराकर मुआवजे का भुगतान कराया जाये।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डी बी भोसले तथा न्यायमूर्ति यशवन्त वर्मा की खण्डपीठ ने औसाफ व आठ अन्य की याचिका पर दिया है।

याचियों का कहना था कि एक जून 1995 को उन्हें जमीन पर पेड़ लगाने का पट्टा दिया गया। हजारों पेड़ लगाये गये, 15 सितम्बर 2017 की रिपोर्ट पर पट्टा निरस्त कर दिया गया। हालांकि यह आदेश बाद में एसडीएम ने वापस ले लिया। तीन जून 2017 को सरकार गांव सभा की पट्टे पर ही दी गयी जमीन वापस ले ली और यमुना एक्सप्रेस वे अथारिटी को सौंप दी। अथारिटी ने बाबा रामदेव की कंपनी को फूड पार्क के लिए जमीन आवंटित कर दी। जिसके चलते हजारों पेड़ उखाड़ दिये गये।

कोर्ट के सख्त रूख के चलते मौके की जांच की गयी। अथारिटी के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि याचीगण की जमीन का किसी को आवंटन नहीं किया गया है। पतंजलि आयुर्वेद कंपनी ने भी कहा कि उसे याची की जमीन नहीं मिली है। पेड़ काटने की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली। अब कोर्ट ने मुआवजा देने को कहा है।

अखाड़ा भवन ध्वस्तीकरण मामला, मुख्यमंत्री कार्यालय के ओएसडी तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुट्ठीगंज अखाड़ा भवन ध्वस्तीकरण मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष कार्याधिकारी अजय कुमार सिंह को
व्यक्तिगत हलफनामे के साथ 29 अक्टूबर को हाजिर होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पूछा है कि क्या उन्होंने आयुक्त इलाहाबाद, जिलाधिकारी इलाहाबाद व नगर आयुक्त नगर निगम को कोई आदेश दिया है। नगर निगम की पत्रावली पर यह संज्ञान में आया है कि विशेष कार्याधिकारी ने अवैध निर्माण ध्वस्त करने को कहा है जो कि कोर्ट की अभिरक्षा में था।

कोर्ट ने नगर निगम की पत्रावली की स्कैन कापी भी याचिका के साथ रखे जाने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र ने मित्रा प्रकाशन कंपनी मामले की सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने एसएसपी की हाजिरी माफ कर दी है। कोर्ट ने मामले में दर्ज एफआईआर की विवेचना प्रगति हलफनामे के साथ एसएसपी नितिन तिवारी को तलब किया है।