इलाहाबाद उच्च न्यायालय-सीधे नियुक्त पद से नहीं दी जा सकती पदावनति

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी पद पर सीधे नियुक्त कर्मी की पदावनति नहीं की जा सकती। कोर्ट ने पदावनति देने के उप महाप्रबंधक पारीक्षा थर्मल प्रोजेक्ट झांसी के आदेश को रद्द करने के एकल पीठ के फैसले को सही माना है और फैसले के खिलाफ दाखिल अपील खारिज कर दी है।

Published by Anoop Ojha Published: April 22, 2019 | 9:24 pm
Modified: April 22, 2019 | 10:31 pm

प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी पद पर सीधे नियुक्त कर्मी की पदावनति नहीं की जा सकती। कोर्ट ने पदावनति देने के उप महाप्रबंधक पारीक्षा थर्मल प्रोजेक्ट झांसी के आदेश को रद्द करने के एकल पीठ के फैसले को सही माना है और फैसले के खिलाफ दाखिल अपील खारिज कर दी है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति राजेन्द्र कुमार की खण्डपीठ ने झांसी के लेक्चरर मोहम्मद इसरार खान की अपील पर दिया है। अपील पर अधिवक्ता धनंजय कुमार ने बहस की। मालूम हो कि आशीष कुमार हजेला के पिता की सेवाकाल में मौत पर आश्रित कोटे में लेक्चरर पद पर नियुक्ति की गयी। महाप्रबंधक की संस्तुति  पर चीफ इंजीनियर विद्युत बोर्ड लखनऊ ने नियुक्ति की। विभाग ने लेक्चरर  पद की सीधी भर्ती पर सवालों की समीक्षा की और कहा कि याची को लेक्चरर नियुक्त नहीं किया जा सकता।

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उसे सहायक अध्यापक एल.टी.ग्रेड पर पदावनति दे दी गयी जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी। कोर्ट ने कहा परिनियम में संशोधन पिछली तिथि से प्रभावी नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि याची की लेक्चरर पद पर सीधी नियुक्ति की गयी है। उसकी नियुक्ति सहायक अध्यापक पद पर कभी नहीं की गयी थी। ऐसे में उसे पदावनति नहीं दी जा सकती।

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यहां तक कि दंड स्वरूप भी पदावनति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के न्यादर सिंह केस  के हवाले से कहा कि मेडिकल आफिसर को कम्पाउण्डर या वार्ड ब्वाय पद पर नहीं भेजा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जिस पद पर नियुक्ति की गयी है, उससे नीचे के पद पर पदावनति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि उप महाप्रबंधक का 11 जुलाई 2001 का याची को पदावनति देने का आदेश अवैध है।

एकल पीठ ने इसे निरस्त कर सही किया है। अपीलार्थी भी लेक्चरर है, उसने याची की सीधी नियुक्ति पर आपत्ति की थी। उसका कहना था कि इस पद को सीधी नियुक्ति से नहीं भरा जा सकता।