घर पहुंचकर भी बेगाने हुए मजदूर, जगह नहीं तो खेत में ही बना लिया एकान्तवास

बाहर से आ रहे प्रवासी श्रमिकों के लिए सरकार बड़े बड़े दावे कर रही है। उन्हें घरेलू एकान्तवास में रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। दावा यह भी है कि जिसके पास एकान्तवास में रहने की व्यवस्था नहीं है उसे सरकारी व्यवस्था सुलभ होगी।

अम्बेडकर नगर: बाहर से आ रहे प्रवासी श्रमिकों के लिए सरकार बड़े बड़े दावे कर रही है। उन्हें घरेलू एकान्तवास में रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। दावा यह भी है कि जिसके पास एकान्तवास में रहने की व्यवस्था नहीं है उसे सरकारी व्यवस्था सुलभ होगी। लेकिन यंहा सब कुछ हवा हवाई हो रहा है। बाहर से आ रहे प्रवासी श्रमिक गाँव पहुंचकर या तो पन्नी के नीचे रहने को मजबूर हो रहे हैं या फिर गाँव के बाहर पेड़ की छाँव में एकान्तवास का समय गुजार रहे है।

प्रशासन नहीं ले रहा ऐसे लोगों की सुध

प्रशासन ऐसे लोगों की सुधि नहीं ले रहा है। उन्हें न तो प्रशासन की तरफ से अभी तक राशन ही दिया गया और न अन्य कोई सुविधा प्रदान की गयी। घर के लोग उन्हें लाकर वंही पर भोजन दे जा रहे हैं और यह प्रवासी श्रमिक अपने घर आने के बावजूद बेगानो की तरह चिलचिलाती धूप में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। सरकार द्वारा घोषित योजनाओं को परखने के लिए इस सम्वाददाता ने बसखारी विकासखंड के देवहट गांव का जायजा लिया।

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कोई खेत तो कोई बाग में ऐसे गुजार रहा समय

यंहा पर कई जगह प्रवासी मजदूर एकान्तवास में रह रहे हैं। कोई खेत में है तो कोई बाग में ,कोई एक पॉलिथीन के सहारे इस चिलचिलाती धूप में एकान्तवास का समय गुजार रहा है। हर जगह एक ही बात सामने आई कि सरकार द्वारा घोषित योजनाओं का लाभ इन प्रवासी मजदूरों को नहीं मिल सका है। इस गांव में अधिकांश लोगों का वृद्धा व विधवा पेंशन भी नहीं बना है। पेंशन न मिलने से बुजुर्ग महिलाओं का इलाज भी नहीं हो पा रहा है। यहां प्रवासी मजदूरों का कहना है कि हम लोगों के घर पर रहने की व्यवस्था न होने के कारण मजबूरन एक पॉलिथीन के टेंट में रहने को विवश हैं।

प्रशासन ने मजदूरों को घरों में एकान्तवास में रहने का दिया निर्देश

इस ग्राम सभा में कई जगह पर कई प्रवासी मजदूर रह रहे हैं। कोई खेत में अपना आशियाना बनाया है तो कोई बाग में, यहां तक कि कुछ प्रवासी मजदूर खेत मे छप्पर रख कर अपना समय काट रहे है। देवहट गांव के प्रधान से बात करने का प्रयास किया गया ,उन्हें कई बार फ़ोन भी किया गया लेकिन प्रधान कुछ बोलने को तैयार हुए। प्रशासन ने गैर प्रदेशों से आ रहे प्रवासी मजदूरों को घरों में एकान्तवास में रहने का निर्देश दिया है।

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घर पर रहने की जगह नहीं, इसलिए मजबूर हैं

प्रशासन का यह निर्देश मजदूरों की जिंदगी को किस कदर प्रभावित कर रहा है वह काफी भयावह है। गौरतलब है कि बाहर से आ रहे प्रवासी मजदूरों का स्क्रीनिंग कर प्रशासन उनको अपने गांव भेज रहा है। लेकिन तमाम ऐसे मजदूर हैं जिनके पास घर में रहने की जगह है नहीं है। टेंट में रह रहे प्रवासी मजदूरों का कहना है कि वे 11 दिन पहले आए थे तब से इसी टेंट में हैं। घर पर रहने की जगह नहीं, इसलिए मजबूरी है। अब तक हमें कहीं से कोई सहयोग नहीं मिला। इस सम्बन्ध में जब अपर जिलाधिकारी पंकज वर्मा से सम्पर्क करने का प्रयास किया गया तो हमेशा की तरह उनका फोन फिर नही उठा।

रिपोर्ट- मनीष मिश्रा

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