मेरठ के डीजीसी सिविल को हटाने का आदेश रद्द, तुरंत नियुक्ति करने का आदेश

कोर्ट ने कहा है कि जिला न्यायाधीश के परामर्श से जिलाधिकारी की संस्तुति पर याची की नवम्बर 18 में नियुक्ति की गयी थी, बिना कारण बताये जनवरी 19 में हटा दिया गया और पार्टी प्रवक्ता की पत्नी भावना भदौरिया को अपर डीजीसी नियुक्त कर दिया गया, जिसे चुनौती दी गयी थी।

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ के डीजीसी (सिविल) पुष्पेन्द्र कुमार को पद से हटाये जाने के 22 जनवरी 19 के आदेश को अवैध व मनमाना पूर्ण करार देते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को उन्हें तुरंत नियुक्ति पत्र जारी कर एक माह के भीतर कार्य सौंपने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने कहा है कि जिला न्यायाधीश के परामर्श से जिलाधिकारी की संस्तुति पर याची की नवम्बर 18 में नियुक्ति की गयी थी, बिना कारण बताये जनवरी 19 में हटा दिया गया और पार्टी प्रवक्ता की पत्नी भावना भदौरिया को अपर डीजीसी नियुक्त कर दिया गया, जिसे चुनौती दी गयी थी। यह आदेश न्यायमूर्ति पी.के.एस.बघेल तथा न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खण्डपीठ ने पुष्पेन्द्र कुमार की याचिका पर दिया है।

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याचिका पर अधिवक्ता राहुल मिश्र ने बहस की। याची को नवम्बर 19 तक के लिए नियुक्त किया गया था किन्तु उसे कार्य नहीं करने दिया गया और 22 जनवरी 19 को हटा दिया गया। याची ने इसे अनुच्छेद 166 के विपरीत करार देते हुए चुनौती दी। बिना राज्यपाल की अनुमति के नहीं हटाया जा सकता।

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याची की नियुक्ति कानूनी प्रक्रिया के तहत की गयी है। बिना कारण बताये हटाया नहीं जा सकता। सरकार का कहना था कि किसी को नियुक्ति पाने या नवीनीकरण कराने का कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सरकार यदि अपर डीजीसी रखना चाहती है तो जिला जज की सूची से रख सकती है।