फीस रेग्युलेशन एक्ट-2018 को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्कूल (फीस रेग्युलेशन) एक्ट 2018 को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि एक्ट के दायरे में अल्पसंख्यक संस्थाएं भी आयेंगी।

Published by Aditya Mishra Published: July 6, 2019 | 9:10 pm
Modified: July 6, 2019 | 9:16 pm
इलाहाबाद हाईकोर्ट

प्रयागराज: हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्कूल (फीस रेग्युलेशन) एक्ट 2018 को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि एक्ट के दायरे में अल्पसंख्यक संस्थाएं भी आयेंगी। उनको अनुच्छेद 30 (1) में प्राप्त विशेषाधिकार इस मामले में लागू नहीं होता है।

कोर्ट ने कहा कि एक्ट लागू करने का उद्देश्य हर नागरिक की शिक्षण संस्थाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना और संस्थाओं के संचालन में पारदर्शिता लाना है।

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इसमें अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाएं भी शामिल है। डायोसिस आफ वाराणसी एजुकेशन सोसायटी और नौ अन्य की याचिकाओं को खारिज करते हुए यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति एस.एस.शमशेरी की पीठ ने दिया है।

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याचिका में फीस रेग्युलेशन एक्ट 2018 को चुनौती देते हुए कहा गया कि अल्पसंख्यक संस्थाएं इसके दायरे में नहीं आयेगी। क्योंकि उनको अनुच्छेद 30 (1) में संरक्षण प्राप्त है। सरकार को अल्पसंख्यक संस्थाओं के कार्य में हस्तक्षेप और शुल्क निर्धारित करने का आदेश देने का अधिकार नहीं है।

कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि रेग्युलेशन का मकसद शैक्षणिक संस्थाओं में मनमानी शुल्क वृद्धि और शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोकना है। सरकार को अल्पसंख्यक संस्थाओं के दैनिक कार्य में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है मगर शुल्क में वृद्धि को लगाये गये प्रतिबंध पूरी तरह से उचित है।

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