किले में तब्दील अयोध्या: सीमाएं सील, पक्षी भी नहीं मार पाएगा पर

अयोध्या में सुरक्षा को लेकर पहले से हाई अलर्ट है। जगह-जगह जवानों की तैनाती की गई है, ताकि कोई घटना ना घटें। जल्द ही अयोध्या  पर फैसला आने वाला हैं। फैसला से पहले यहां अंबेडकर नगर के अलग-अलग कॉलेजों में 8 अस्थाई जेल बनाई गई है। प्रशासन ने ऐसा फैसला सुरक्षा के मद्देनजर लिया है।

Published by suman Published: November 8, 2019 | 9:40 pm
Modified: November 8, 2019 | 10:17 pm

जयपुर: अयोध्या में सुरक्षा को लेकर पहले से हाई अलर्ट है। जगह-जगह जवानों की तैनाती की गई है, ताकि कोई घटना ना घटें। जल्द ही अयोध्या  पर फैसला आने वाला हैं। फैसला से पहले यहां अंबेडकर नगर के अलग-अलग कॉलेजों में 8 अस्थाई जेल बनाई गई है। प्रशासन ने ऐसा फैसला सुरक्षा के मद्देनजर लिया है।

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संवेदनशील मामला

राम मंदिर का संवेदनशील मामला होने की वजह से ऐसा किया गया है। पुलिस मुख्यालय ने सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील 34 जिलों के पुलिस प्रमुखों को भी निर्देश दिए हैं। इन जिलों में मेरठ, आगरा, अलीगढ़, रामपुर, बरेली, फिरोजाबाद, कानपुर, लखनऊ, शाहजहांपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर और आजमगढ़ हैं।

 

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जन संवाद सिस्टम की महत्ता पर बल

इस मामले में पूर्व पुलिस उप महानिदेशक (डीजीपी) ब्रजलाल ने याद करते हुए कहा था, ‘बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के दो दिन बाद मुझे सूचना दी कि मेरठ में मेरी हत्या की अफवाह फैली है और तनाव पैदा हो रहा है तब वे मेरठ के एसएसपी (वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक) थे। उन्होंने जन संवाद सिस्टम के माध्यम से अफवाह को खारिज किया। आज वट्सऐप और एसएमएस से ऐसी अफवाहें खतरनाक गति से फैल सकती हैं।’उस नियंत्रण व समझदारी की जरूरत है। पूर्व डीजीपी ने कहा कि सितंबर 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में अयोध्या पर फैसले के समय वो सहायक डीजीपी (कानून व्यवस्था) थे और उन्होंने सभी जिलों में उचित स्थानों पर जनसंवाद सिस्टमों को सुनिश्चित किया था।

 

पुलिस विभाग अपने वाहनों की भी मरम्मत और सर्विस करा रहा है, जिससे आपातकाल में कोई समस्या ना आ जाए। उन्होंने कहा, ‘अफवाहों और गलत जानकारियों को फैलने से रोकने के लिए सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखना है।

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