खारिज हुआ मुसलमानों का दावा: राम जन्मस्थान पर नहीं है कब्रिस्तान

मुस्लिम पक्षकारों के  दावों को ख़ारिज करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि यहां पहले कोई कब्रिस्तान नहीं था। सुप्रीम कोर्ट के वकील एमआर शमशाद द्वारा 9 मुस्लिम निवासियों की ओर से मंदिर ट्रस्ट को भेजे गए एक पत्र के जवाब में प्रशासन ने यह बात कही है।

अयोध्या: सुप्रीमकोर्ट के फैसले के बाद एक फिर राम मंदिर से संबंधित एक विवाद सामने आया जिसमें  67 एकड़ भूमि पर मुस्लिम पक्षकारों के दावों को जिलाधिकारी ने खारिज कर दिया है। मुस्लिम पक्षकारों के  दावों को ख़ारिज करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि यहां पहले कोई कब्रिस्तान नहीं था। सुप्रीम कोर्ट के वकील एमआर शमशाद द्वारा 9 मुस्लिम निवासियों की ओर से मंदिर ट्रस्ट को भेजे गए एक पत्र के जवाब में प्रशासन ने यह बात कही है।

राम जन्मभूमि क्षेत्र के 67 एकड़ के परिसर में कोई कब्रिस्तान नहीं

दरअसल मामला यह है कि वकील ने दावा किया था कि भूमि का उपयोग पहले कब्रिस्तान के रूप में किया गया था। जिस पर अयोध्या डीएम अनुज झा ने संवाददाताओं को बताया कि वर्तमान में राम जन्मभूमि क्षेत्र के 67 एकड़ के परिसर में कोई कब्रिस्तान नहीं है।”

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उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को मामले की सुनवाई के दौरान (अयोध्या राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद) पत्र की सामग्री (वकील एमआर शमशाद द्वारा लिखित) सहित सभी तथ्यों से अवगत कराया गया था। सुनवाई के दौरान भी यह मुद्दा उठाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर, 2019 को दिए गए अपने फैसले पर सभी तथ्यों को स्पष्ट कर दिया था।”

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में 2.77 एकड़ हिंदू पक्षकारों को सौंपा था

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में 67 एकड़ और 2.77 एकड़ (निर्णय से पहले विवादित स्थान) को राम मंदिर निर्माण के लिए हिंदू पक्षकारों को सौंप दिया था। अदालत ने साथ ही केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट का गठन करें।