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श्रमजीवी एक्स. विस्फोट कांड में कोर्ट ने एक आरोपी को दी फांसी की सजा

suman

sumanBy suman

Published on 30 July 2016 9:21 AM GMT

श्रमजीवी एक्स. विस्फोट कांड में कोर्ट ने एक आरोपी को दी फांसी की सजा
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जौनपुर: श्रमजीवी एक्सप्रेस में 28 जुलाई, 2005 को हुए बम धमाके में अपर जिला व सत्र न्यायाधीश (प्रथम) बुधिराम यादव की कोर्ट ने एक आरोपी आलमगीर उर्फ रॉनी को फांसी की सजा सुनाई है। वहीं, दूसरे आरोपी उबैदुर्रहमान पर सजा का ऐलान 2 अगस्त को होगा। इस मामले में दो और आरोपी हिलाल और नफीकुल विश्वास हत्या के एक मामले में 17 नवंबर 2005 को गिरफ्तार किए गए थे। तभी से वे हैदराबाद जेल में हैं। जहां उस मामले की सुनवाई चल रही है। बता दें कि श्रमजीवी एक्सप्रेस धमाके में 12 लोग मारे गए थे और 18 अन्य घायल हुए थे।

क्या है पूरा मामला ?

11 साल पहले 28 जुलाई, 2005 को श्रमजीवी एक्सप्रेस पटना से नई दिल्ली जा रही थी। शाम को 5 बजकर 20 मिनट पर सिंगरामऊ क्षेत्र में हरपालगंज स्टेशन से आगे रेलवे क्रॉसिंग के पास जनरल बोगी में बम विस्फोट हुआ। इस बम विस्फोट में 12 लोग मारे गए थे। वहीं, 18 से ज्यादा घायल हुए थे। साल 2006 में स्थानीय कोर्ट में इस केस की सुनवाई शुरू हुई थी। इसमें कुल 53 गवाह पेश किए गए थे।

गवाहों ने की थी पहचान

जीआरपी के दो गवाहों, कॉन्सटेबल सुरेश यादव और श्यामजी ने धमाके वाले दिन वाराणसी कैंट स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 9 पर रॉनी और हिलाल को क्षतिग्रस्त कोच में घबराए हुए झांकते देखा था। दोनों गवाहों ने इन्हें कोर्ट में पहचान लिया। कुछ और घायल हुए लोगों ने भी इन्हीं से मिलते-जुलते लोगों को देखने की बात कोर्ट में कही थी। इस धमाके का मास्टरमाइंड कंचन उर्फ शरीफ पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। एक अन्य आरोपी याह्या उर्फ गुलाम पजदानी मुठभेड़ में मारा जा चुका है। आरोपी डॉक्टर सईद के नाम-पते की जांच अभी तक पूरी नहीं हो सकी है।

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