Top

जांच में हुई लीपापोती, भ्रष्टाचार के नए रिकॉर्ड बना रहा मंडी परिषद

suman

sumanBy suman

Published on 9 July 2016 7:09 AM GMT

जांच में हुई लीपापोती, भ्रष्टाचार के नए रिकॉर्ड बना रहा मंडी परिषद
X
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

राजेन्द्र के. गौतम

लखनऊ: किसानों के हितैषी बनने का स्वांग रचने वाला मंडी परिषद भले ही बीते चार सालों में किसानों का हमदर्द न बन पाया हो, लेकिन भ्रष्टाचार के नए-नए कीर्तिमान जरूर स्थापित किए हैं। भ्रष्टाचारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अपने काले कारनामों को छिपाने के लिए उन्होंने रिकार्ड को आग के हवाले कर दिया है। वहीं पानी के बुलबुले की तरह मंडी परिषद में तैनात भ्रष्टाचार के आरोपी अफसरों के कारनामे सामने आ रहे हैं। मंडी परिषद के काले कारनामों से मुख्यमंत्री की छवि को धूमिल कर रहे हैं।

उत्तराखंड कैडर के पीसीएस अफसर और मंडी परिषद में अपर निदेशक राम विलास यादव बीते चार सालों से ज्याादा समय से इस पद पर डटे हुए हैं। एलडीए में तैनाती के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप में सस्पेंड किए जा चुके हैं। मण्डी परिषद में नियमों को ताक पर रखने के माहिर इस खिलाड़ी ने भ्रष्टाचार के ऐसे-ऐसे कारनामे अंजाम दिए हैं, जिनकी गूंज शासन तक पहुंची, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

बुंदेलखण्ड पैकेज में घपला करने के आरोप में मुख्य अभियंता द्वितीय हाकिम सिंह सस्पेंड हुए थे, लेकिन एक मंत्री के संरक्षण के कारण मामले को रफा-दफा करके कुछ ही दिनों में बहाल हो गए थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नियमों को ताक पर रखकर बीते चार सालों में हाकिम सिंह को चार डीपीसी हुई हैं। 11 अप्रैल 2016 को हुई मंडी परिषद के अफसरों की डीपीसी में मुख्य अभियंता द्वितीय का पद भी शामिल था। लेकिन मुख्य अभियंता द्वितीय के पद पर धारणा अधिकार उदय प्रताप सिंह का था। मण्डी परिषद ने इस तथ्य को जानबूझ कर शासन से छिपाया।

मंडी परिषद में तेजी से हुआ प्रमोशन

इसके बाद से हाकिम सिंह के प्रभाव की वजह से आज तक डीपीसी की लिस्ट जारी नहीं हुई है, जिससे मंडी परिषद के बाकी अफसरों में जबरदस्त गुस्सा है। साल 2012 में पैक्सपैड में अवर अभियंता के पद पर जितेन्द्र यादव की नियुक्ति हुई। कुछ ही माह बाद मंडी परिषद में तीन साल के लिए प्रतिनियुक्ति पर आ गए। मंडी निदेशक की मेहरबानी के चलते कुछ ही दिनों में सहायक अभियंता का प्रभार दिया गया। बीती 29 जून को उपनिदेशक निर्माण का प्रभार दे दिया गया। यूपी के किसी भी सरकारी विभाग में इतनी तेजी से पदोन्नति नहीं हुई, जितनी तेजी से मंडी परिषद में हो रही है।

बीज विकास निगम के एक सहायक अभियंता सुनील कुमार का भी यही हाल है। अपनी पहुंच के बल पर जहां तीन साल के लिए मंडी परिषद में अपनी तैनाती करवा ली। वहीं नियमों को ताक पर रखकर बगैर पद के सिस्टम मैनजर का पद भी हासिल कर लिया है। इन इंजीनियर महोदय का इतिहास भी काफी रोचक है। साल 2008 में तत्कालीन प्रमुख सचिव कृषि बीएम मीना ने सुनील कुमार समेत कई अन्य अफसरों-कर्मचारियों की नियुक्ति की जांच की थी, जिसमें सुनील कुमार की नियुक्ति गलत पाई गई थी।

भुगतान में भ्रष्टाचार का खेल

श्री मीना की जांच रिपोर्ट को इसने अपने रसूखों के चलते दबाव दिया था। सुनील के पास बीज विकास निगम में सहायक अभियंता की भी योग्यता नहीं थी। मुख्यमंत्री को की गई शिकायत में कहा गया है कि सिस्टम मैनेजर सुनील कुमार ने मंडी परिषद में हुए कंप्यूटरीकरण के दौरान हुए भुगतान में भ्रष्टाचार का खेल खेला था। इसकी जांच वरिष्ठ पीसीएस अफसर राहुल सिंह ने किया था। शुरुआती जांच में दोषी पाए जाने पर सुनील कुमार का सारा कार्य छीन लिया गया था।

जांच रिपोर्ट के आधार पर अफसरों की एक कमेटी इनके भ्रष्टाचार और फर्मों से बिना काम कराए भुगतान की जांच कर रही है। मंडी परिषद में हुए अनगिनत वित्तीय अनियमितताओं को छिपाने के लिए कुछ माह पूर्व मंडी परिषद की बिल्डिंग में अचानक आग लग गई। इस आग को लेकर मंडी परिषद में यह चर्चा रही कि घपलों को छिपाने के लिए आग लगाई गई। इस मामले की जांच कृषि उत्पादन आयुक्त प्रवीर कुमार ने अपने स्टाफ अफसर मार्केंडय शाही को सौंपी थी। सूत्रों का कहना है कि इस आग की जांच रिपोर्ट में लीपापोती कर दी गई है, जिससे मंडी परिषद के घपले बाजों को बचाया जा सके। मंडी परिषद के निदेशक अनूप यादव से सम्पर्क किए जाने पर प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।

suman

suman

Next Story