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वायरल हुआ कुर्बानी की धनराशि केरल बाढ़ पीडितों को दान करने का मैसेज, इमाम बोले- ऐसा मत करना

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sudhanshuBy sudhanshu

Published on 20 Aug 2018 2:33 PM GMT

वायरल हुआ कुर्बानी की धनराशि केरल बाढ़ पीडितों को दान करने का मैसेज, इमाम बोले- ऐसा मत करना
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सहारनपुर: ज़मीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक और सहारनपुर के इमाम क़ारी इसहाक़ गोरा ने सोमवार को बयान जारी किया है कि सोशल नेटवर्क पर एक ख़बर तेज़ी से वायरल हो रही है। जिसमें कहा जा रहा है कि “मुसलमान इस वर्ष क़ुरबानी ना करें, यही पैसा केरल के बाढ़ पीड़ित लोगों को दे दें”। ये एक गुमराह करने वाला वायरल मैसेज है। ईद उल अज़हा के मौके पर क़ुरबानी करना साहिबे निसाब पर एक फ़र्ज़ ए इबादत है और क़ुरबानी का जो मक़सद है उस पर खुदा का जो सवाब है। वह केरल सैलाब पीड़ित लोगों की मदद से हासिल नहीं हो सकता है।

हर साल कुर्बानी जरूरी

इमाम क़ारी इसहाक़ गोरा ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद साहब ने क़ुरबानी को नबी हज़रत इब्राहिम की सुन्नत बताया है। हर वर्ष क़ुरबानी का ऐहतमाम फ़रमाया है। फ़रमाया है कि ईद उल अज़हा के दिनों में क़ुरबानी सब से अफ़्ज़ल अमल है। हदीसों की पुस्तकों में इसका प्रमाण मौजूद है। इसलिए मुसलमानों को चाहिए कि वह ज़रूर क़ुरबानी करें। अगर गुंजाइश हो तो छोटे जानवर की क़ुरबानी करें। यदि इसकी गुंजाइश ना हो तो बड़े जानवर में हिस्सा लें।

क़ारी इसहाक़ गोरा ने ये भी कहा कि मुसलमानों के लिए ये भी ज़रूरी है कि वह अलग से केरल बाढ पीड़ित भाइयों की ज्यादा से ज्यादा इमदाद करें और उसके लिए अलग से ख़र्च करें। जिस तरह हम अपनी ज़ाती ज़रूरतों को पूरा करते हैं उसी का एक हिस्सा निकाल कर बाढ़ से पीड़ित लोगों की मदद के लिए भेजें।

उन्होंने कहा कि इस्लाम में सदक़ा, खेरात, इमदाद की बड़ी फ़ज़ीलत है। शरीयत के अनुसार क़ुरबानी के जानवर की खाल, हड्डियाँ, झोल,रस्सी व घंटी वगैरह का पैसा सब सदक़ा कर देना वाजिब है। इमदाद की राशि के साथ मुसलमानों को चाहिए इनकी जो रक़म मिले उसे भी सदके के तोर पर सेलाब पीड़ित लोगों को पहुंचाएं।

क़ारी इसहाक़ गोरा ने ईद उल अज़हा पर्व को ले कर कहा कि इस्लाम में पाकी आधा ईमान है। मुसलमानों को जिस्मानी पाकी के साथ साथ ईद उल अज़हा के मौके पर भी अपने मोहल्ले, शहरों, और क़स्बों को पाक साफ़ रखना चाहिए। अपने साथ इसका भी ख़याल रखें कि दूसरे समुदाय के लोगों को तकलीफ़ ना पहुँचे। शरीयत में किसी को भी तकलीफ़ पहुँचाना जायज नहीं है।

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