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आसान नहीं 'मंजिल': नेता-थानेदार गठजोड़, अनसुलझे केस बड़ी चुनौतियां

Rishi

RishiBy Rishi

Published on 18 May 2016 9:28 PM GMT

आसान नहीं मंजिल: नेता-थानेदार गठजोड़, अनसुलझे केस बड़ी चुनौतियां
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लखनऊः मंजिल सैनी ने बुधवार को लखनऊ के एसएसपी का कार्यभार संभाल लिया। पत्रकारों ने उनसे राजधानी में तैनात दारोगाओं और नेताओं से साठ-गांठ और राजनीतिक दखल के बारे में पूछा। मंजिल ने इस पर कहा कि वह खुद इटावा से आई हैं। साफ संदेश उन नेताओं के लिए है, जो पुलिस के काम में टांग अड़ाते हैं।

हालांकि, मंजिल की राह आसान नहीं है। नेताओं से गठजोड़ करने वाले थानेदारों को हटाना और कई बड़ी अनसुलझी घटनाओं का खुलासा उनके लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

क्या कहते हैं जानकार?

-जानकारों के मुताबिक नेताओं से रिश्तों की वजह से कई थानेदार यहां जमे हुए हैं।

-इन थानेदारों को हटाना मंजिल सैनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनने वाली है।

-थानेदारों के नेताओं से गठजोड़ ने ही लॉ एंड ऑर्डर की समस्या खड़ी की है।

-कई केस ऐसे हैं, जिनका वर्कआउट करना भी मंजिल सैनी के लिए चुनौती है।

इन केसों का खुलासा होना बाकी

-सीएम आवास के पास आरएलबी स्टूडेंट की गैंगरेप के बाद हत्या मामले में कोई सफलता नहीं।

-27 फरवरी 2015 को हसनगंज में कैश वैन के तीन गार्डों की हत्या के बाद 50 लाख की लूट।

-22 जून 2015 को सरोजनीनगर में कैश वैन के गार्ड की हत्या, 10 लाख की लूट।

-19 नवंबर 2015 को होटलकर्मी नमन वर्मा की हत्या के मामले का अभी तक खुलासा नहीं।

-4 दिसंबर 2015 को मड़ियांव में दो महिलाओं के कटे पैर और धड़ मिलने का केस।

कई और केस भी अनसुलझे

-5 मार्च 2016 को डॉन मुन्ना बजरंगी के साले और दोस्त की हत्या।

-इसी तारीख को गोमतीनगर में रितेश अवस्थी की दिनदहाड़े हत्या।

-10 जुलाई 2014 को गोसाईगंज में पेड़ से दो शव लटके मिलने का मामला।

खुलासे के इंतजार में डकैती के भी कई मामले

-5 जनवरी 2016 को गोमतीनगर में आईएएस अफसर, पत्नी और नौकरों को बंधक बनाकर वारदात।

-2 मई 2016 को बीकेटी में तीन घरों में डकैत आए, कई को घायल किया।

-13 मई 2016 को पीजीआई थाना इलाके में बुजुर्ग पर जानलेवा हमला और डकैती।

-27 जून 2015 को चिनहट में रिटायर्ड अफसर के घर वारदात।

-11 सितंबर 2015 को जानकीपुरम में दो घरों में डकैती, एक की हत्या।

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आशीष शर्मा ऋषि वेब और न्यूज चैनल के मंझे हुए पत्रकार हैं। आशीष को 13 साल का अनुभव है। ऋषि ने टोटल टीवी से अपनी पत्रकारीय पारी की शुरुआत की। इसके बाद वे साधना टीवी, टीवी 100 जैसे टीवी संस्थानों में रहे। इसके बाद वे न्यूज़ पोर्टल पर्दाफाश, द न्यूज़ में स्टेट हेड के पद पर कार्यरत थे। निर्मल बाबा, राधे मां और गोपाल कांडा पर की गई इनकी स्टोरीज ने काफी चर्चा बटोरी। यूपी में बसपा सरकार के दौरान हुए पैकफेड, ओटी घोटाला को ब्रेक कर चुके हैं। अफ़्रीकी खूनी हीरों से जुडी बड़ी खबर भी आम आदमी के सामने लाए हैं। यूपी की जेलों में चलने वाले माफिया गिरोहों पर की गयी उनकी ख़बर को काफी सराहा गया। कापी एडिटिंग और रिपोर्टिंग में दक्ष ऋषि अपनी विशेष शैली के लिए जाने जाते हैं।

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