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झांसी में कोरोना बेकाबूः न इंजेक्शन, न बेड, जनता हो रही बेचैन

कोरोना महामारी की लहर से हर दूसरा व्यक्ति संक्रमित हो रहा है। स्वास्थ्य महकमे में सिस्टम की बेचारी भी झेल रहा है।

BK Kushwaha

BK KushwahaReporter BK KushwahaShraddhaPublished By Shraddha

Published on 20 April 2021 3:03 PM GMT

झाँसी में कोरोना की दूसरी लहर ने कोहराम मचा रखा
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कोरोना की दूसरी लहर फाइल फोटो (सौजन्य से सोशल मीडिया )

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झाँसी : कोरोना की दूसरी लहर ने प्रदेश की राजधानी के साथ साथ अब झाँसी (jhansi) में भी अपना प्रकोप छोड़ना शुरु कर दिया है। कोरोना की दूसरी लहर में झाँसी में बीते 24 घंटे में जहां सात लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं 457 नए मामलों ने स्वास्थ्य विभाग (health Department) की नींद उठा रखी है। झाँसी में पिछले एक सप्ताह से यह आंकड़े बेहद चौका रहे हैं क्योंकि अब जनपद में एक्टिव केसों की संख्या पांच हजार पार कर गई है। कोरोना महामारी (Corona epidemic) की लहर से हर दूसरा व्यक्ति अब संक्रमित हो रहा है और अपनी जान बचाने के लिए स्वास्थ्य महकमे में सिस्टम की बेचारी भी झेल रहा है।

झाँसी में कोरोना की दूसरी लहर ने कोहराम मचा रखा है। यहां प्रत्येक दिन कोरोना संक्रमित (Corona infected) मरीजों की संख्या सैकड़ों से अधिक आ रही है। लिहाजा झाँसी में यह आंकड़ा अब पांच हजार पार चुका है। अगर सरकारी आंकड़ों की बात की जाये तो सोमवार को सात व्यक्तियों ने कोरोना से जंग लड़ने के दौरान अपनी जान गंवा दी है, लेकिन हर आंकड़ों पर गौर न किया जाए तो यह संख्या दर्जनों से ऊपर पहुंच चुकी है।

झाँसी के हालात काफी खराब

कोरोना की दूसरी लहर के रोकथाम के प्रशासन लाख दावे जरुर रोज कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही देखने को मिल रही है। प्रत्येक दिन बाजारों में उमड़ने वाली हजारों की भीड़ और बैंकों के बाहर लाइन लगाने वाले पंचायत चुनाव के प्रत्याशी सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क का प्रयोग करते नहीं दिख रहे हैं। लिहाज प्रत्येक दिन झाँसी में कोरोना के चौंकने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं। जिला प्रशासन ने बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए जिले में नाईट कर्फ्यू का भी ऐलान कर दिया है, लेकिन बावजूद इसके आंकड़ों में कोई कमी आती नजर नहीं आ रही है। इसके अलावा शुक्रवार से सोमवार तक लॉकडाउन लगने जा रहा है।

कोरोना संक्रमित मरीज फाइल फोटो (सौजन्य से सोशल मीडिया )


न इंजेक्शन, न मिल रहे हैं बैड

कोरोना का इलाज करने आ रहे मरीजों को न तो इंजेक्शन दिए जा रहे हैं और न ही सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में बैड। यह हालात झाँसी शहर में चार दिनों से बन हुए हैं। रोजाना कोरोना पॉजिटिव मरीजों की मौतें हो रही है लेकिन यह आंकड़े में नहीं है। शमशान घाट जाकर पता चलता है कि फलां की मौत कोरोना से हुई है। लोगों का कहना है कि इंजेक्शन भी वीआईपी लोगों को दिए जा रहे हैं। गरीबों की कोई सुनने वाला नहीं है। चर्चा यह है कि जिन लोगों को जिम्मेदारी इंजेक्शन की दी गई है। वह लोग भी अपने चहेते को दे रहे हैं। इसको लेकर झाँसी की जनता में काफी आक्रोश भड़क रहा है। यह आक्रोश झाँसी में किसी भी समय भयावह हो सकता है।

जान मेरी, अर्थी प्रशासन की

कोरोना की भयावह स्थिति सामने आ रही है। अप्रैल माह में ही अब तक आधिकारिक आंकड़े के अनुसार 17 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं इतनी ही संख्या में गैर सरकारी आंकड़े भी हैं जिनकी मौत बाहर हुई है। कोविड से मौत के बाद ऐसे भी मौके आए हैं कि शव के अंतिम संस्कार को स्वजन तैयार नहीं होते हैं। कोविड प्रोटोकॉल के तहत कोरोना संक्रमित मरीज की मौत के बाद संबंधित अधिकारी और पुलिस की मौजूदगी में शव का अंतिम संस्कार किया जाता है।

Shraddha

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