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कैबिनेट पर होगा कैराना इफेक्ट- बदलेगा स्वरुप, पद कद मे होगा बदलाव

shalini

shaliniBy shalini

Published on 1 Jun 2018 8:32 AM GMT

कैबिनेट पर होगा कैराना इफेक्ट- बदलेगा स्वरुप, पद कद मे होगा बदलाव
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लखनऊ:उत्तर प्रदेश में जिस तरह से मतदाताओँ ने भाजपा को तीन महीने में तीसरी बार नकार दिया है। फूलपुर और गोरखपुर की प्रतिष्ठित सीटों के बाद कैराना में अपने प्रयोग में विफल भाजपा अब नए सिरे से अपने कील कांटे दुरुस्त करेगी।

माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार आने के बाद अब मतदाता किसी भी तरह का बहाना सुनने को तैयार नहीं हैं। उसे काम चाहिए अब लोकसभा हो या विधानसभा मतदाता को काम से कम कुछ नहीं चाहिए। ऐसे में माना जा रहा है कि अब कैराना के बाद योगी मंत्रिमंडल में होने वाला विस्तार और फेरबदल इससे बहुत प्रभावित होगा। योगी सरकार के मंत्रिमंडल में फेरबदल बहुत दिन से प्रस्तावित है ऐसे में अब इसे चुनाव से पहले कील कांटे दुरुस्त करने वाला आखिरी फेरबदल माना जाएगा। दरअसल उत्तर प्रदेश राज्य सरकारों का खामियाजा हमेशा केंद्र मे उसी पार्टी की सरकार को भुगतना पडता है। अब तक भाजपा ने 2014 और 2017 में विकास के नाम पर हिंदुत्व की चाश्नी में चुनाव लड़ा और जीता पर अब चाश्नी फीकी पड़ती दिख रही है और विकास के नाम पर बहुत कुछ धुंधला है।

कैराना इफेक्ट

सिर्फ विस्तार ही नहीं इस बार मंत्रिमंडल में फेरबदल भी होगा। कई मंत्रियों को प्रमोशन को कुछ को डिमोशन और संगठन की राह दिखाई जा सकती है। इस बार प्रमोशन पाने वालों सबसे आगे नाम पार्टी के संगठन के माहिर माने जाने वाले महेंद्र सिंह का है। इनको कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। इसके अलावा कल्याण सिंह के पोते संदीप सिंह को राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाकर उनके विभाग बढाने पर विचार हो रहा है वहीं इसी विभाग की मंत्री अनुपमा जायवाल को लेकर आलाकमान ज्यादा खुश नहीं है। वैसे भी वह कैराना लोकसभा के एक अहम जिले शामली की प्रभारी भी हैं जहां पार्टी नहीं जीत सकी है। वहीं स्वतंत्र देव सिंह और सत्यदेव पचौरी पर भी बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। अनिल राजभर को राज्यमंत्री से प्रमोट किया जा सकता है। दरअसल ओमप्रकाश राजभर से लगातार बिगड़े बोल और बदले सुर भाजपा को रास नहीं आ रहे हैं ऐसे में राज्यसभा में सकलदीप राजभर को टिकट देने के बाद अब अनिल राजभर का प्रमोशन कर पार्टी अपनी पेशबंदी पूरी करना चाहती है। माना जा रहा है कि आज नहीं तो कल ओमप्रकाश राजभर से पार्टी का संबंध विच्छेद होना है यह भाजपा भी जान चुकी है और आफत आने से पहले की तैयारी भी उसने शुरु कर दी है। प्रमोशन पाने वालों में अब सुरेश राणा का नाम आगे हैं जिस तरह से चीनी मिलों से बकाया दिलाया गया और जिस तरह से पश्चिम में उनका प्रभाव है उसे देखते हुए उनका कद बढाया जा सकता है। वैसे भी कैराना उपचुनाव में मिली हार में भी वह अपनी विधानसभा में भाजपा को जिता दिया था। इसके अलावा धर्मसिंह सैनी से आलाकमान खुश तो नहीं है पर सैनी कश्यप मतदाताओं बड़ी तादाद को देखते हुए उन्हें जीवनदान मिल सकता है।

सेहत के सूबे को नया खेवन हार

मंत्रिमंडल के अगले फेरबदल में उत्तर प्रदेश में अब सेहत के सूबे को नया खेवनहार मिल सकता है। सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह को हो सकता है कि किसी बड़े मंत्रालय का प्रभार मिल जाय पर स्वास्थ्य मंत्री का चेहरा बदला जाना करीब-करीब तय है। अस्पतालो में कई तरह घटनाओं और सुचारु नहीं हो पा रही स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ ही अब सीएमओ नियुक्ति को लेकर भी सीएम आफिस ने सवाल उठा दिए है। ऐसे में हो सकता है कि विभाग के हिसाब से वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री प्रमोट हो जाएं पर उनका ट्रांसफर तो फिलहाल दिख ही रहा है।

इन फेरबदलों पर भी चर्चा

इस समय योगी सरकार में 47 मंत्री हैं ऐसे में 12 और लोगों को जगह मिल सकती है। वैसे इस बार के मंत्रिमंडल में नए मंत्रियों की संख्या 3-4 ही होगी और न ही पूरी जगहें भरी जाएंगी। नए मंत्रियों में प्रतापगढ के बाबागंज विधानसभा से निर्दलीय विधायक विनोद कुमार की जगह पक्की मानी जा रही है। राज्यसभा चुनाव में उनका भाजपा को दिया वोट और रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया से उनकी करीबी इसकी सबसे खास वजह है। वहीं लक्ष्मीकांत वाजपेयी और नवनिर्वाचित एमएलसी विजय बहादुर पाठक को ब्राह्मण चेहरों के तौर पर शामिल किया जा सकता है।

लक्ष्मीकांत वाजपेयी अभी किसी सदन के सदस्य नहीं है पर उन्हें लेकर लोकसभा के टिकट या मंत्रीपद पर पार्टी पशोपेश में है। इस पर भी फैसला किया जा सकता है। फैजाबाद के रुदौली से दो विधायक रामचंद्र यादव को भी इस बार रणनीति के तहत मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। इसके अलावा दलित और अति पिछड़े सैनी, कश्यप जाति के 6 विधायकों के भी नाम पर चर्चा होनी है।

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