प्रदूषण से बचने के लिए आईआईटी कानपुर ने उठाया ये बड़ा कदम

सोलर एनर्जी से चार्ज होने वाला ये रिक्शा एक बार से चार्ज होने पर तीन से चार घंटे तक चल सकता है। इसमें 12 वोल्ट की चार बैट्री लगी है इसके साथ ही 300 वाट का सोलर पैनल लगाया है।

Published by Aditya Mishra Published: August 25, 2019 | 7:43 pm
Modified: August 25, 2019 | 7:44 pm

कानपुर: आईआईटी कानपुर पिछले कई दशकों से प्रदूषण के खिलाफ जंग लड़ रहा है। यही वजह है कि आईआईटी कैंपस के अंदर छात्र और वहां रहने वाले कर्मचारी आवाजाही के लिए साईकिल का इस्तेमाल करते है।

आईआईटी प्रशासन ने मेन गेट से छात्रों और कर्मचारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए सोलर रिक्शे लगाए है।

आईआईटी प्रशासन को सेंट्रल इलेक्ट्रानिक लिमिटेड (सीईएल) ने पांच सोलर रिक्शे डोनेट किए है। इन रिक्शों के प्रयोग के बाद पांच रिक्शे और दिए जाएगें।

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आईआईटी कानपुर का सीईएल से करार

आईआईटी कानपुर का सीईएल से करार हुआ है। आईआईटी के मेन गेट से हास्टल और कैंपस तक जाने के लिए छात्रो को कई किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ता था।

सोलर एनर्जी से चार्ज होने वाला ये रिक्शा एक बार से चार्ज होने पर तीन से चार घंटे तक चल सकता है। इसमें 12 वोल्ट की चार बैट्री लगी है इसके साथ ही 300 वाट का सोलर पैनल लगाया है।

इस रिक्शे की कीमत लगभग 68 हजार रुपए है। वहीं सामान्य ई रिक्शे की कीमत एक लाख 25 हजार रुपए है। सोलर रिक्शों को आईआईटी कानपुर में शोध के लिए लाया गया है।

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आईआईटी को डोनेशन में मिले पांच रिक्शे

आईआईटी कानपुर के निदेशक अभय कंदीकर के मुताबिक सेंट्रल इलेक्ट्रानिक लिमिटेड ने सीएसआर फंड से आईआईटी को पांच रिक्शे डोनेट किए है। हम इसको प्रयोग के तौर पर चला रहे है।

इस रिक्शे को हम अपने कैंपस में चलाएंगे। छात्रों को और जो कैंपस रेजिडेंट है उनको एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने का काम करेगा। भविष्य में और रिक्शे आएगें तो 10 रिक्शे हो जाएगें। ये रिक्शे मेन गेट पर मौजूद रहेंगे।

सेंट्रल इलेक्ट्रानिक लिमिटेड सीएमडी बीएम सरकार के मुताबिक आईआईटी को रिक्शा देने का उद्देश्य ये है कि जब वो कैंपस में चलेंगे तो आईआइटी कानपुर उसे और डेवलप करेगा। इस टेक्नालाजी को और बढाने का काम करेगा। आने वाले समय में इस रिक्शे का उपयोग कामार्शिल कामो में भी हो सके।

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