कानपुर 2017 : सत्ता बदली मगर अपराधों पर नहीं लग सका अंकुश

कानपुर : जिले का 2017 हादसों और अपराधों से भरा रहा। सत्ता बदली मगर अपराधों पर अंकुश नहीं लग सका। साल की शुरुआत में सपा नेता महताब आलम की पांच मंजिला निर्माणाधीन इमारत गिर जाने से 10 मजदूरों की मौत हो गई थी और एक दर्जन से ज्यादा मजदूर घायल हो गए थे। इस हादसे सेना व एनडीआरफ की टीम ने तीन दिन रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर घायलों व मृतकों के शव निकाले थे।

वहीं लखनऊ में हुए आईएसआईएस आतंकी सैफुल्ला के एनकाउंटर के तार भी कानपुर से जुड़े। ये दो ऐसे मामले थे जिसने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा। वहीं कानपुर में हत्या,रेप,लूट और चोरी की घटनाओं की पूरे साल बाढ़ रही।

अवैध बिल्डिंग ने ली दस की जान

चकेरी थाना क्षेत्र स्थित जाजमऊ में 1 फरवरी 2017 को सपा नेता महताब आलम की पांच मंजिला निर्माणाधीन बिल्डिंग भरभरा कर गिर गई थी। बिल्डिंग में काम रहे तीन दर्जन से ज्यादा मजदूर दब गए थे जिसमें 10 मजदूरों की दबकर मौत हो गई थी। दरसल सपा नेता महताब आलम अवैध बिल्डिंग बनवाने का काम करता था।

इसके बाद उसे बेचता था। इस मामले में महताब के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। महताब आलम कोर्ट में पेश नहीं हुआ तो कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने महताब आलम के घर की कुर्की की थी। इस हादसे में मरने वालों को आज तक न्याय नहीं मिला है। इनके परिवारों की स्थिति काफी खराब है। कुछ परिवार तो कानपुर छोडक़र अपने गांव को वापस लौट गए हैं।

मीडिया में छाया सैफुल्ला एनकाउंटर

लखनऊ के ठाकुरगंज में आईएसआईएस एजेंट सैफुल्ला का एनकाउंटर हुआ था। सैफुल्ला चकेरी के ताडबगिया का रहने वाला था। इस एनकाउंटर के बाद एनआईए टीम सक्रिय हो गई थी। इसके बाद एनआईए की टीम ने सैफुल्ला के घर पर छापेमारी की थी। सैफुल्ला के पिता सरताज अहमद ने बेटे का शव लेने से इनकार कर दिया था।

सैफुल्ला के चाचा नसीम अहमद के घर पर भी एनआईए की टीम ने छापेमारी की थी। नसीम अहमद के तीन बेटे हैं। फैसल, इमरान और दानिश। फैसल को एटीएस ने घर से और इमरान को उन्नाव के बंथरा से गिरफ्तार किया था। इस घटना से जुड़े कई लोगों को एटीएस व एनआईए ने पकड़ा था।

चुनावों में भाजपा का परचम

2017 में विधानसभा चुनाव से लेकर निकाय चुनाव तक सिर्फ बीजेपी का परचम लहराया है। प्रदेश विधानसभा चुनाव में कानपुर की सात विधानसभा सीटें बीजेपी ने जीती और दो सीटें सपा ने। कांग्रेस की झोली में सिर्फ एक सीट आई।
निकाय चुनाव में भी बीजेपी ने अपने झंडे गाड़े हैं। भाजपा ने मेयर की सीट पर कब्जा करने के साथ 110 वार्डों में लगभग 62 वार्डों में जीत हासिल की है। जीत से उत्साहित बीजेपी कार्यकर्ता अब आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हैं।

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