कानपुर के इस मंदिर में हुआ था औरंगजेब का घमंड चूर, जानें कैसे?

Published by Newstrack Published: August 1, 2016 | 2:58 pm
Modified: August 10, 2016 | 2:47 am

कानपुर:  भगवान शिव का ये मंदिर कानपुर से 60 किलोमीटर दूरी पर परौली गांव में है। ये बाबा महादेव मंदिर के नाम से फेमस है। मंदिर लगभग 5 वीं सदी में बना है। कानपुर स्थित इस मंदिर की सभी मूर्तियों को मुगल शासक औरंगजेब ने खंडित कर दिया था, लेकिन वो भगवान शंकर के शिवलिंग को जमीन से नहीं हिला सका। कई माह की खुदाई के बाद भी जब वो शिवलिंग खंडित नहीं कर पाया तो क्रोध में आकर भगवान नंदी की विशाल मूर्ति को खंडित कर दिया था।

इस महादेव मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां बड़े से बड़े मुकदमे में फंसे लोग आसानी से बरी हो जाते हैं और नव दंपति मंदिर में मत्था टेकने के बाद ही अपने जीवन की शुरुआत करें तो सुख और शांतिमय जीवनयापन होता है।

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फिलहाल ये मंदिर 40 सालों से पुरातत्व विभाग के अधीन है और पुरातत्व विभाग ही मंदिर की देख रेख करता है। इस मंदिर का इतिहास तो किसी को नहीं पता है, लेकिन मंदिर का शिवलिंग औरंगजेब जैसे तानाशाह का अहम को चूर अपनी सत्यता को साबित कर दिया है।

मंदिर की 40 साल से देख-रेख करने वाले पुजारी सुरेंद्र दास के मुताबिक इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है ।  कभी यहां पर बहुत बड़ा जंगल हुआ करता था। उन्होंने बताया कि मंदिर का शिवलिंग अद्भुत है। ये शिवलिंग जमीन के अंदर कितना गहरा है इसका अबतक पता नहीं चल पाया।

पुरातत्व विभाग ने जब ये मंदिर अपने कास्टडी में लिया तो उन्होंने पाया कि ये मंदिर गुप्तकाल का है और इसे किसी गुप्त कालीन के राजा ने बनवाया था। इस मंदिर की मूर्तियों को जिस पत्थर से बनाया गया है वो अब भारत में नहीं, चीन में पाया जाता है।

इस मंदिर की खास बात ये है कि शिवलिंग के ऊपर छत नहीं पड़ी है और इसका चबूतरा भी शिवलिंग के आकार का बना हुआ है ।भोले बाबा के इस मंदिर में दर्शन मात्र से हर कष्ट का निदान आसानी से हो जाता है। वैसे भी मनोकामना पूरी होने से शिवलिंग पर दूध चढ़ाने की परंपरा  है।

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