क्या फिर करवट लेगी यूपी की सियासत, साथ आएंगे शिवपाल और अखिलेश?

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने घोषणा की दयाराम पाल समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए है। दयाराम पाल बसपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं।

लखनऊ: सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने घोषणा की दयाराम पाल समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए है। दयाराम पाल बसपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं।

इसके साथ ही उन्होंने एक बार फिर उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा और कहा कि यूपी सरकार का काउंटडाउन शुरू हो गया है। डॉ. आंबेडकर, लोहिया जी और कांशीराम जी के सपने को पूरा करने के लिए सपा परिवर्तन का काम करेगी।

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वहीं चिन्मयानंद की गिरफ्तारी के मामले पर सपा मुखिया का कहना था कि कानून अपना काम करेगा, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट पीड़ित बेटी को न्याय दिलाएंगे ये हमें विश्वास है।

शिवपाल यादव के पार्टी और परिवार में वापसी के संकेतों पर अखिलेश का कहना था कि हमारे परिवार में परिवारवाद नहीं बल्कि लोकतंत्र है। जो अपनी विचारधारा से चलना चाहे वो वैसे चले और जो आना चाहे हम उसे अपनी पार्टी में शामिल कर लेंगे आंख बंद करके।

इसके साथ ही उन्होंने शिवपाल की पार्टी सदस्यता रद्द करने की याचिका को भी वापिस लेने की बात कही।

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लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद बढ़ी कड़वाहट

हालांकि अलग पार्टी बनाने के बाद शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच दूरियां लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद और बढ़ गईं। बताया जाता है कि समाजवादी पार्टी की हार के बाद हुई समीक्षा में शिवपाल की भूमिका को भी अहम माना गया।

शिवपाल की पार्टी ने चुनाव में सपा के खिलाफ भी प्रत्याशी उतारे। वह खुद भी फिरोजाबाद से चुनाव लड़े। हालांकि वे खुद जीत तो नहीं सके लेकिन उन्होंने भतीजे अक्षय की हार में अहम भूमिका निभाई। इतना ही नहीं यादव परिवार के गढ़ कन्नौज और बदायूं में भी हार के पीछे शिवपाल का अलग होना प्रमुख वजह रही।

2016 में शुरू हुई तनातनी

बता दें यूपी विधानसभा चुनाव से पहले 2016 में यादव परिवार में महाभारत की शुरुआत हुई। बात इतनी बढ़ी की अखिलेश ने समाजवादी पार्टी पर एकाधिकार कर लिया। उसके बाद चुनाव में समाजवादी पार्टी के हार के बाद शिवपाल ने बयानबाजी शुरू कर दी।

जिसके बाद उन्होंने समाजवादी मोर्चे का गठन किया और फिर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) का गठन किया। इस बीच अखिलेश और शिवपाल के बीच सुलह की कई कोशिशें हुईं, लेकिन सभी नाकाम साबित हुईं।

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