अवैध खनन को लेकर CM ने मंत्री गायत्री-प्रमुख सचिव को किया तलब

Published by August 10, 2016 | 12:06 pm
akhilesh

लखनऊ: यूपी में अवैध खनन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी और फिर सीबीआई जांच के चलते सरकार नींद से जाग गई है। सीएम अखिलेश यादव ने बुधवार को विभागीय मंत्री समेत जिम्मेदारों को तलब किया है। कोर्ट ने बालू माफियाओं और स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहे अवैध खनन की जांच सीबीआई को सौंप दी है। इस बारे में प्रदेश के प्रमुख सचिव खनन से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था। पर वह कोर्ट में संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। ध्यान रहे, दो साल तक खनन विभाग यूपी के वर्तमान सीएम अखिलेश यादव के पास भी रहा है।

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सीएम अखिलेश यादव ने बुधवार को सीएम आवास पर शाम 5:30 बजे विभागीय मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति, प्रमुख सचिव न्याय व प्रमुख सचिव खनन को तलब किया है। बैठक में प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री और प्रदेश के महाधिवक्ता भी मौजूद रहेंगे।

-बैठक में खनन संबंधी प्रकरणों की समीक्षा होगी।
-बताया जा रहा है कि सीएम बैठक में कुछ कड़े फैसले ले सकते हैं।

कोर्ट ने भी की थी तल्ख टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले दिनों कहा था कि यूपी सरकार द्वारा अवैध बालू खनन के काम को बंद कराए जाने के काम में दिलचस्पी नहीं लिए जाने के बाद इस मामले में सीबीआई जांच के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचता है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि सरकारी अफसरों की जानकारी और उनकी मिलीभगत के बिना अवैध खनन मुमकिन ही नहीं है। हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रमुख सचिव का यह कहना कि उन्हें किसी भी जिले में अवैध खनन की सूचना नहीं है। यह आंख में धूल झोंकने जैसा है।

-देवरिया, संभल, बदांयू, बागपत, कौशाम्बी, शामली, जालौन, बांदा, हमीरपुर सहित कई अन्य जिलों से यचिकाएं दाखिल की गई हैं।
-कोर्ट ने इन शिकायतों को गंभीरता से लिया।
-और पूरे प्रदेश में अवैध बालू खनन के मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है।
-यूपी सरकार ने संसाधनों की कमी का हवाला दिया था।
-सेटेलाइट मैपिंग से निगरानी कराने में लाचारी जताई थी।
-साथ ही कहा था कि उसकी जांच में समूचे यूपी में कहीं भी अवैध बालू खनन होते नहीं पाया गया।

पूर्व आईएएस भी इस पर कर चुके हैं टिप्पणी

यूपी कैडर के रिटायर्ड आईएएस सूर्य प्रताप सिंह का कहना है कि यूपी में अवैध खनन कराने वाले “आकाओ” जेल जाने के लिए हो जाओ तैयार!
-उन्होंने पूछा है कि आखिर मंत्री गायत्री प्रजापति पर सरकार के आका इतने महरबान क्यों हैं?